भोपाल समाचार, 26 फरवरी 2026 : भोपाल के तालाब की जमीन पर अतिक्रमण है, इस बात को लेकर कोई विवाद नहीं है लेकिन जिला प्रशासन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं करता। जब भी प्रेशर क्रिएट होता है, सीमांकन की कार्रवाई शुरू हो जाती है। पिछली मीटिंग में कलेक्टर ने कहा था कि अब सीधे कार्रवाई होगी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। लाल निशान लगाना शुरू कर दिया। शुक्रवार से सीमांकन करेंगे और फिर मामले को ठंडा बस्ते में डाल देंगे।
Encroachment on Lake Land in Bhopal, Demarcation Exercise Begins Again
कलेक्टर की टीम ने बुधवार को 16 बड़े अतिक्रमण की मार्किंग की। गुरुवार को खानूगांव, लालघाटी से हलालपुरा बस स्टैंड, वीआईपी रोड, करबला आदि जगहों पर टीमें पहुंची। बैरागढ़ एसडीएम रविशंकर राय और तहसीलदार हर्षविक्रम सिंह के नेतृत्व में टीमों ने यह कार्रवाई की। 20 से ज्यादा अतिक्रमण फाइंड आउट किए। टीटी नगर की टीम अब तक काम पर नहीं निकली। टीम लीडर एसडीएम अर्चना शर्मा का कहना है कि अभी तो हमने टीम बनाई है। शुक्रवार से सीमांकन की कार्रवाई शुरू करेंगे।
कितनी बार सीमांकन और सर्वे करोगे
बता दें कि बड़ा तालाब का बीते दस साल में 3 बार सर्वे हो चुका है। इनमें बड़ी संख्या में अतिक्रमण सामने आए, लेकिन सर्वे रिपोर्ट का आज तक पता नहीं है। इस वजह से बैरागढ़, खानूगांव, सूरज नगर, गौरागांव, बिसनखेड़ी समेत कई जगहों पर अतिक्रमण हुए। कई मैरिज गार्डन, फार्म हाउस, स्कूल-कॉलेज, घरों की सीमाएं बड़ा तालाब में हैं।
क्सपर्ट राशिद नूर की मानें तो शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बन गए हैं। ऐसे 1 या 2 नहीं, बल्कि सैकड़ों निर्माण हैं।
भदभदा, बिसनखेड़ी, गौरागांव, बील गांव और सूरजनगर में बड़ी बिल्डिंग, फार्म हाउस, रिसॉर्ट भी देखने को मिल सकते हैं। हैरत की बात ये है कि बड़ा तालाब रामसर साइट भी है। बावजूद सालों से सिर्फ फाइलों में ही कब्जे हटे हैं।
सूरजनगर में तो जिस जगह पर रामसर साइट है और नगर निगम की मुनार लगी है। ठीक उससे जुड़ी बिल्डिंग की बाउंड्रीवॉल है। यही पर नगर निगम की सीवेज लाइन भी बिछाई गई है। मुनार के पास सड़क भी भरी गई है, जो नियम के विरुद्ध है। दूसरी ओर गौरागांव से बील गांव की तरफ सड़क भी तालाब के बीच से ही गुजरी है।
भोपाल का प्रशासन ही तालाब का दुश्मन हो गया
बड़ा तालाब के किनारों पर भू-माफिया सक्रिय हैं, जो कम दाम पर प्लाट देने का वादा कर रहे हैं। उन्होंने और लोगों ने इस दायरे को लेकर ही भ्रम की स्थिति भी खड़ी की है। जिन मुनारों से एफटीएल की सीमा तय होती है, उन्हीं में फर्जीवाड़ा किया गया है। मौके पर एफटीएल बताने वाली 5 तरह की मुनारे लगे हुए मिले हैं। इनमें से एक में बीएमसी यानी, भोपाल म्युनसिपल कॉर्पोरेशन लिखा है। बाकी पर सफेद रंग है। लिखा कुछ नहीं है। इन्हीं फर्जी मुनारों के आसपास अतिक्रमण और अवैध निर्माण है।
यह सब कुछ खुलेआम हो रहा है और प्रशासन की जानकारी में हो रहा है। चिंता की बात यह है कि भोपाल का जिला प्रशासन ही भोपाल के तालाब का दुश्मन हो गया है। जब बगड़ ही खेत की रक्षा करना बंद कर दे तो फिर उसको मवेशी से कौन बचा सकता है।
5 महीने पहले मुख्यमंत्री ने कहा था, फिर भी कुछ नहीं हुआ
बड़ा तालाब को लेकर सरकार तो गंभीर है, लेकिन भोपाल जिला प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों का माफियाओं के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर सामने आ रहा है। करीब पांच महीने पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने तालाब के आसपास के अतिक्रमण का नए सिरे से सर्वे करने के निर्देश नगरीय आवास एवं विकास विभाग की बैठक में दिए थे। मुख्यमंत्री के निर्देश का भी पालन नहीं हुआ।
शोर शराबा करो तो झुग्गी बस्ती पर बुलडोजर चला देते हैं
करीब दो साल पहले, जब बात काफी बढ़ गई थी तो जिला प्रशासन ने भदभदा झुग्गी बस्ती से कुल 386 घरों को हटाया गया था। एनजीटी ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण की 10 साल में यही एकमात्र बड़ी कार्रवाई थी। इसके बाद जब भी हुआ कार्रवाई शुरू होने का ड्रामा हुआ। कारवाई कभी नहीं हुई।

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