भोपाल समाचार, 22 फरवरी 2026: यदि कहीं व्यवस्था के चलते रेल यात्रियों को थोड़ी राहत मिल जाए तो पश्चिम मध्य रेलवे, भोपाल मंडल के अधिकारी, ऐसे बयान जारी करते हैं जैसे यात्रियों की सुविधा के लिए भगीरथ की तरह दिन रात काम कर रहे हैं। लेकिन असलियत यह है कि भोपाल बीना के रेल यात्रियों को दी गई राहत वापस ले ली गई है और रेल यात्रियों में रेलवे के खिलाफ काफी आक्रोश है।
Coach Cut in Bhopal–Bina MEMU Sparks Passenger Outrage
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यात्रियों को राहत देने के उद्देश्य से 1 फरवरी से इस ट्रेन में 12 कोच की रेक शुरू की गई थी। लेकिन विडंबना यह है कि महज सात दिनों के भीतर ही रेलवे ने कोचों की संख्या घटाकर फिर से 8 कर दी। वर्तमान में शादियों का सीजन होने के कारण ट्रेनों में पहले से ही भीड़ अधिक है। ऐसे में कोच कम किए जाने से छोटे स्टेशनों के यात्री सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
ग्राउंड रिपोर्ट:
जान जोखिम में डाल रहे यात्री ट्रेन में भीड़ का आलम यह है कि बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं धक्का-मुक्की के बीच दरवाजों पर लटककर यात्रा करने को मजबूर हैं। यात्रियों ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया:
• छात्रा छाया जैन ने बताया कि 12 कोच होने से कुछ राहत मिली थी, लेकिन अब फिर से ट्रेन में चढ़ना मुमकिन नहीं रह गया है। वहीं सलोनी शर्मा का कहना है कि भीड़ की वजह से वे रोज कॉलेज देरी से पहुँच रही हैं और गेट पर लटके रहने के कारण हादसे का खतरा बना रहता है।
• विदिशा निवासी रितु शर्मा ने एक चौंकाने वाली घटना साझा की। उन्होंने बताया कि गंज बासौदा से लौटते समय भीड़ इतनी अधिक थी कि उनके परिवार के चार सदस्य ट्रेन में चढ़ ही नहीं पाए और उनका सामान भी स्टेशन पर ही छूट गया।
प्रशासन को चेतावनी: 'बहाल करें कोच या झेलें आंदोलन'
इस अव्यवस्था को लेकर अब विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। भोपाल मंडल की रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति के सदस्य कमलेश सेन ने मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को पत्र लिखकर 12 कोच वाली रेक को तत्काल बहाल करने की मांग की है।
सेन का कहना है कि 8 कोच हजारों यात्रियों के लिए पर्याप्त नहीं हैं और हर दिन का सफर एक बड़ी चुनौती बन गया है। यात्रियों और समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि रेलवे ने अपना फैसला तुरंत नहीं बदला, तो आने वाले दिनों में बड़ा आंदोलन हो सकता है।
फिलहाल, रेलवे की ओर से कोच कम करने के कारणों पर कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन यात्री भारी असुविधा के बीच सफर करने को मजबूर हैं।

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