REWA में ब्राह्मण ने यादव की चोटी उखाड़ी, जानिए कितनी सच्चाई और कितना बतंगड़

भोपाल, 11 जनवरी 2026
: रीवा जिले के एक मामले को वायरल करने की कोशिश की जा रही है। इसमें बताया जा रहा है कि एक ब्राह्मण युवक ने एक यादव युवक की चोटी इसलिए उखाड़ दी क्योंकि वह ब्राह्मण नहीं है। पुलिस ने भी कार्रवाई नहीं की क्योंकि वह ब्राह्मण नहीं है। आईए जानते हैं कि क्या यह सचमुच कोई घटना है या फिर बात का बतंगड़ बनाया जा रहा है:- 

शिकायतकर्ता रोहित यादव की कहानी जो उसने रीवा के पत्रकारों को बताई

शिकायतकर्ता रोहित यादव ने बताया कि वो सीवर लाइन प्रोजेक्ट में ड्राइवर और हेल्पर का काम करता है। अलग-अलग जगहों पर जाकर सीवर लाइन बिछाता है। उसने बताया कि मुख्य मार्ग में सड़क किनारे काम चल रहा था। जब वह मशीन में डालने के लिए पेट्रोल निकाल रहा था, तभी दीपक पांडेय पहुंचा और गाली-गलौज करने लगा। उसे उठाकर जमीन पर पटक दिया और पीटना शुरू कर दी। दीपक ने जातिसूचक गालियां देते हुए कहा कि तेरा चेहरा देखकर लगता है तू छोटी जाति से है। तू चोरी कर रहा है और ब्राह्मण न होते हुए भी इतनी लंबी चोटी रखी है। तुझे चोटी रखने का कोई अधिकार नहीं है।

रोहित के अनुसार, आरोपी ने यह भी कहा कि “आज चोटी रखोगे, कल कथा करने जाओगे।” यह कहते हुए उसने पीड़ित के ऊपर पैर रखा और पूरी ताकत से उसकी चोटी खींच ली, जिससे चोटी उखड़ गई। इसके बाद भी आरोपी नहीं रुका और मारपीट करता रहा। अब कहीं भी आने-जाने पर डराता और धमकाता है।

पीड़ित ने बताया कि घटना के बाद उसने गांव के लोगों से जानकारी ली, तब आरोपी का नाम दीपक पांडेय सामने आया।

थाने में पुलिसकर्मी ने कहा- चोटी डस्टबिन में डाल दो

रोहित यादव ने पत्रकारों को बताया कि आरोपी के चंगुल से निकलकर वह किसी तरह थाने पहुंचा और मुंशी को पूरी घटना बताई। मुंशी ने पहले मारपीट की जानकारी देने को कहा, लेकिन चोटी के बारे में यह कहते हुए टालने की कोशिश की कि इसे डस्टबिन में डाल दो। पीड़ित ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह उसकी आस्था का प्रतीक है, जिसे वह पिछले सात साल से रखे हुए है। वह स्वयं सनातन धर्म को मानने वाला है। बिना शिकायत दर्ज कराए चोटी को डस्टबिन में डालना उसे स्वीकार नहीं था। इसी दौरान उसे डर लगा कि कहीं चोटी उससे छीन न ली जाए। इसके बाद वह कुछ कदम पीछे गया और चोटी को जेब में छिपा लिया, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे सबूत के तौर पर पेश किया जा सके।

काम बंद करके दूसरे गांव में शुरू कर दिया

रोहित यादव का कहना है कि सुरक्षा के चलते अपना काम मझिगवां गांव से लगभग 20 किलोमीटर दूर क्योंटी गांव में शिफ्ट कर दिया है। पीड़ित का कहना है कि फिलहाल वहीं काम शुरू कर दिया गया है और मझिगवां का काम बाद में पूरा किया जाएगा।

कुछ सवाल जो शिकायतकर्ता की कहानी से पैदा हुए

  • रोहित यादव ने अपनी शिकायत में स्वयं बताया है कि उसका आरोपी के साथ कोई पुराना परिचय नहीं है। 
  • रोहित यादव अपना काम कर रहा था और आरोपी ने अनुमान के आधार पर बिना कोई पूछताछ करे, यह मानते हुए कि वह ब्राह्मण नहीं है, बिना कोई पूछताछ किए, उसकी चोटी उखाड़ दी। सवाल तो बनता है कि क्या ऐसा संभव है। क्या आरोपी को साइको है। यदि आरोपी साइको है तो उसने इस तरह की घटनाएं और भी की होगी। केवल रोहित के साथ ऐसा क्यों किया। 
  • कहानी के अनुसार चोटी उखाड़ने के दौरान रोहित यादव को कोई चोट नहीं आई। ना तो उसने अपना मेडिकल कराया और ना ही पुलिस ने उसका मेडिकल कराया। 
  • शिकायतकर्ता रोहित यादव को पुलिस पर भी भरोसा नहीं है। उसने शिकायत की लेकिन कटी हुई चोटी पुलिस को नहीं दी। क्योंकि शिकायत सुनने वाला एक ब्राह्मण है। कहानी में यहां आकर लगता है कि रोहित यादव खुद साइको है। उसकी लड़ाई केवल दीपक पांडे से नहीं बल्कि सभी ब्राह्मणों से है। 
  • रोहित यादव ने अपनी शिकायत में कहा कि उसे जाति सूचक गालियां दी गई। यादव भगवान श्री कृष्ण का वंश है, जिसकी ब्राह्मण पूजा करते हैं। यादवों को गऊ पालक माना जाता है। ऐसे धर्मनिष्ठ समाज को क्या जाति सूचक गाली दी जा सकती है। 

मुद्दे की बात: शिकायतकर्ता रोहित यादव, सरकारी काम कर रहा था। उसने सरकार से अनुमति नहीं ली और काम बंद करके दूसरे गांव में काम करने लग गया। कहीं ऐसा तो नहीं की लड़ाई की जड़ यही है। रोहित यादव काम बंद करके दूसरे गांव में काम करना चाहता था। इसी बात को लेकर दीपक पांडे से विवाद हो गया और अपने खिलाफ सरकारी कार्यवाही से बचने के लिए रोहित यादव ने अपनी चोटी काटकर बखेड़ा खड़ा कर दिया। 
सबसे बड़ा सवाल की जी दीपक पांडे ने शिखा को लेकर इतना बड़ा बवाल खड़ा किया क्या वह स्वयं शिखा धारण करता है।

डाउट इसलिए भी किया जा रहा है क्योंकि, इस घटना का कोई स्वतंत्र प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। बस एक शिकायत है और केवल एक शिकायत के आधार पर नॉरेटिव बनाया जा रहा है। 

अब जानिए कि शिखा धारण क्यों करते हैं

शास्त्रों के अनुसार भारतवर्ष में सभी हिंदुओं के लिए शिखा और जनेऊ धारण करने का परामर्श है और ब्राह्मण वर्ग के लिए शिखा को अनिवार्य बताया गया है। शिखा और जनेऊ सनातन धर्म के संकल्प का प्रतीक है। इस पर किसी वर्ग विशेष का विशेष अधिकार नहीं है और ना ही शिखा और जनेऊ, किसी जाति या समाज का पहचान चिन्ह है। ब्राह्मण समाज के विद्वान विवाह के समय सभी लोगों को शिखा और जनेऊ का संकल्प दिलाते हैं। 

ऐसी स्थिति में श्री कृष्ण के वंश के रोहित यादव द्वारा उनकी सेवा में तत्पर ब्राह्मण समाज के युवक पर इस तरह का आरोप लगाना एक मनगढ़ंत कहानी से ज्यादा कुछ प्रतीत नहीं होता है।

पुलिस बोली- मामले की जांच कर रहे हैं
बैकुंठपुर थाना प्रभारी घनश्याम मिश्रा ने बताया कि चोटी उखाड़ने से जुड़े आरोपों सहित सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। दीपक पांडेय के खिलाफ रोहित यादव ने आवेदन दिया है। सभी तथ्यों की विवेचना की जा रही है। 

बालों के काटने और टूटने में अंतर होता है। पुलिस को चाहिए कि शिकायत करता है रोहित यादव की छोटी को जप्त करें और जांच करवाई कि उसके बालों को तोड़ा गया है या काटा गया है। इसके लिए फोरेंसिक की जरूरत नहीं है। रीवा का कोई भी एक्सपीरियंस हेयर कटिंग वाला देखते ही बता देगा।

यह है शिकायतकर्ता रोहित यादव जिसको इतना मारा पीटा लेकिन चोट नहीं लगी
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