नई दिल्ली, 7 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश के दो बड़े नेता पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री पद के दावेदार श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच में समझौता हो गया है। इस समझौते का लक्ष्य 15 करोड़ किसान और 12 करोड़ महिलाओं को प्रभावित करना है। इस समझौते का जनता को क्या लाभ मिलेगा यह तो भविष्य ही बताएगा लेकिन एक बात पक्की है कि इस समझौते को लेकर राजनीति में चर्चा काफी होगी।
मामला क्या है: किस मुद्दे पर समझौता हुआ है
भारत सरकार केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और केन्द्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में भारतीय डाक विभाग ने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय तथा ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच आज दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए। दावा किया गया है कि, इन समझौतों से देश के 15 करोड़ किसानों और स्वयं सहायता समूह (SHG) की 12 करोड़ महिलाओं के जीवन में व्यापक और स्थायी परिवर्तन आएगा। केंद्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि इन समझौतों से डाक विभाग बैंकिंग को गांव गांव तक पहुंचाएगा, कीटनाशक सैंपल की प्रक्रिया को सुदृढ़ करेगा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 3 करोड़ लखपति दीदी के संकल्प को गति दी जाएगी। केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन समझौतों से देश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में नया सवेरा आएगा एवं किसानों को नकली खाद के चंगुल से बचाया जाएगा।
किसानों के लिए गुड न्यूज़: नकली खाद, बीज और कीटनाशकों की डिलीवरी मात्र 72 घंटे में
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ हुए पहले समझौते के तहत नकली खाद, बीज और कीटनाशकों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई का रास्ता खुला है। अब इन कृषि इनपुट्स के नमूनों की बुकिंग और डिलीवरी भारतीय डाक की स्पीड पोस्ट सेवा के माध्यम से की जाएगी। नमूनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए QR कोड, डिजिटल सील और तापमान सेंसर जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। ये सैंपल अब 15 से 20 दिन की जगह मात्र 48 से 72 घंटे में प्रयोगशालाओं तक पहुँच सकेंगे, जिससे जांच रिपोर्ट शीघ्र उपलब्ध होगी और दोषी कंपनियों के विरुद्ध त्वरित कार्रवाई संभव हो सकेगी। रियल-टाइम ट्रैकिंग से किसान और अधिकारी मोबाइल पर ही सैंपल की स्थिति देख सकेंगे। यह व्यवस्था नकली कृषि उत्पादों पर अब तक का सबसे सशक्त प्रहार सिद्ध होगी। केन्द्रीय मंत्री सिंधिया ने कहा कि इस समझौते से तकनीक के जरिए किसानों की नकली खाद से पूर्ण रूप से बचाया जाएगा।
स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को IPPB की बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट बनाया जाएगा
दूसरा समझौता डाक विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय के बीच हुआ, जिसका उद्देश्य ‘लखपति दीदी’ अभियान को नई गति देना है। इस पहल के तहत लाखों SHG दीदियाँ इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक की बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट बनेंगी और उन्हें बैंकिंग सेवाएँ, बीमा, तथा ई-कॉमर्स पार्सल बुकिंग जैसी सेवाओं का प्रशिक्षण, टैबलेट, पीओएस मशीन और प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। इसके माध्यम से SHG दीदियाँ हर महीने ₹15,000 से ₹30,000 तक अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी। साथ ही, डाक निर्यात केंद्रों (DNK) के ज़रिये SHG उत्पादों को वैश्विक बाज़ारों तक पहुँचाया जाएगा, जिससे ग्रामीण उद्यमिता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी।
निष्कर्ष
इस समझौते के बाद किसानों द्वारा भेजे गए सैंपल 72 घंटे में प्रयोगशाला तक पहुंच जाएंगे लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रयोगशाला इतनी ही तेजी से रिपोर्ट दे पाएगी। कहीं इस मामले में भी DNA रिपोर्ट जैसी स्थिति तो नहीं बन जाएगी। सैंपल कई महीने तक प्रयोगशाला में पड़े रहेंगे और किसान का सीजन ही निकल जाएगा। दूसरा मामला स्वयं सहायता समूह का है। भारत में स्वयं सहायता समूह का गठन एक विशेष उद्देश्य के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए 10 महिलाओं ने पापड़ का बिजनेस करने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाया है। क्या महिलाएं अपना बिजनेस छोड़कर IPPB की बिज़नेस कॉरेस्पॉन्डेंट बनना पसंद करेंगे। क्योंकि यह विकल्प उनके पास पहले भी था।
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