Parth Credit Indore करोड़ों की जमीन का केस जीता, सिर्फ 9 महीने में प्रॉपर्टी डिस्प्यूट सॉल्व

Updesh Awasthee
इंदौर, 28 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने 27 जनवरी 2026 को 'पार्थ क्रेडिट एंड कैपिटल मार्केट प्राइवेट लिमिटेड' और 'आइडियल इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड' के बीच चल रहे करोड़ों रुपये के विवाद में एक महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण दिया है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यदि किसी समझौते में नकद भुगतान की शर्त अनिवार्य नहीं है, तो चेक द्वारा किया गया भुगतान कानून की नजर में वैध माना जाएगा।

Parth Credit and Capital Market Private Limited vs Ideal Electronics Private Limited

• याचिकाकर्ता (Petitioner/Judgment Debtor): पार्थ क्रेडिट एंड कैपिटल मार्केट प्राइवेट लिमिटेड, इंदौर और अन्य।
• प्रतिवादी (Respondent/Decree Holder): आइडियल इलेक्ट्रॉनिक्स प्राइवेट लिमिटेड, मुंबई (निदेशक पवन कुमार चोपड़ा के माध्यम से)।
• याचिकाकर्ता के वकील: श्री मिनी रवींद्रन।
• प्रतिवादी के वकील: श्री अभय चंद जैन।

Parth Credit and Capital vs Ideal Electronics Story

यह मामला मूल रूप से एक भूमि बिक्री समझौते और धन की वसूली से संबंधित दो मुकदमों (केस नंबर 69A/2016 और 97/2020) से पैदा हुआ। दोनों पक्षों के बीच 20 जुलाई 2021 को 5,32,38,000 रुपये के भुगतान पर एक एग्रीमेंट हुआ था। एग्रीमेंट की शर्त यह थी कि याचिकाकर्ता पार्थ क्रेडिट एंड कैपिटल को एक वर्ष के भीतर यह राशि चुकानी थी, अन्यथा प्रतिवादी आइडियल इलेक्ट्रॉनिक्स को बदियाकीमा स्थित कृषि भूमि की रजिस्ट्री अपने पक्ष में कराने का अधिकार मिल जाता।

याचिकाकर्ता पार्थ क्रेडिट एंड कैपिटल ने समझौते की अवधि (एक वर्ष) समाप्त होने से पहले, 18 जुलाई 2022 को न्यायालय में चेक के माध्यम से पूरी राशि जमा कर दी थी। हालांकि, प्रतिवादी ने 90 दिनों के बाद इन चेकों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि भुगतान नकद या किस्तों में नहीं किया गया था।

याचिकाकर्ता पार्थ क्रेडिट के वकील श्री मिनी रवींद्रन की दलीलें

• एग्रीमेंट में भुगतान के किसी विशेष तरीके (जैसे केवल नकद) या ब्याज का उल्लेख नहीं था।
• सर्वोच्च न्यायालय द्वारा के. सरस्वती बनाम सोमसुंदरम चेट्टियार मामले में फैसला दिया गया है कि, चेक एक लीगल टेंडर है और इसके माध्यम से भुगतान स्वीकार किया जाना चाहिए।
• यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता चेक जारी होने की तारीख (18.07.2022) से ब्याज सहित राशि भुगतान करने के लिए तैयार है।

प्रतिवादी आइडियल इलेक्ट्रॉनिक्स के वकील श्री अभय चंद जैन की दलीलें

• एग्रीमेंट के तहत राशि सीधे प्रतिवादी को तीन किस्तों में दी जानी थी, न कि अदालत में चेक के रूप में।
• प्रतिवादी ने 'रेस ज्यूडिकाटा' (Res Judicata) का सिद्धांत लागू करने की मांग की, यह कहते हुए कि निष्पादन अदालत पहले ही याचिकाकर्ता की आपत्तियों को खारिज कर चुकी थी।

न्यायाधीश का निर्णय और टिप्पणी:

माननीय न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह माना कि:
1. चेक एक वैध भुगतान है: न्यायालय ने कहा कि समकालीन समाज में चेक से भुगतान एक मानक व्यावसायिक प्रक्रिया है और इसे तब तक अवैध नहीं माना जा सकता जब तक कि वह बाउंस न हो जाए।
2. समझौते की शर्तों का पालन: याचिकाकर्ता ने निर्धारित एक वर्ष की अवधि के भीतर चेक जमा कर दिए थे, इसलिए समझौते का उल्लंघन नहीं माना जा सकता।
3. हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत ने यह मानकर गलती की कि चेक द्वारा भुगतान वैध नहीं है।

अदालत का अंतिम आदेश:

इंदौर के 13 जिला न्यायाधीश द्वारा दिनांक 12 अप्रैल 2025 को इस मामले में फैसला दिया गया था। हाई कोर्ट ने 12 अप्रैल 2025 को निष्पादन न्यायालय द्वारा पारित आदेश को रद्द कर दिया। दिनांक 3 दिसंबर 2025 को सभी पक्षों की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट द्वारा फैसला सुरक्षित कर लिया गया था। दिनांक 27 जनवरी 2026 को माननीय न्यायाधीश द्वारा फैसला सुनाया गया। हाई कोर्ट ने ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वह 5,32,38,000 रुपये की राशि, 18 जुलाई 2022 से 12% साधारण ब्याज के साथ, नए चेक के माध्यम से 30 दिनों के भीतर जमा करे। यदि याचिकाकर्ता इस निर्देश का पालन करने में विफल रहता है, तो निष्पादन की कार्यवाही कानून के अनुसार आगे बढ़ेगी।
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