भोपाल समाचार, 28 जनवरी 2026: फर्जी मूल निवासी प्रमाणपत्र के आधार पर गांधी मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने वाले एक डॉक्टर को भोपाल की अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत ने आरोपी डॉक्टर को चार अलग-अलग धाराओं में तीन साल की सजा सुनाई है। यह फैसला लगभग 15 वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया है।
फर्जी डॉक्यूमेंट से MBBS में एडमिशन ले लिया
यह मामला वर्ष 2010 में उजागर हुआ था। जांच में पता चला कि आरोपी डॉक्टर सुनील सोनकर ने PMT परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद खुद को मध्यप्रदेश का मूल निवासी बताकर राज्य कोटे के तहत गांधी मेडिकल कॉलेज में MBBS की सीट हासिल की थी। बाद में मिली शिकायत पर इस डोमिसाइल प्रमाणपत्र की जांच कराई गई, जिसमें कई गंभीर विसंगतियाँ सामने आईं।
STF जांच में फर्जी साबित हुआ निवास प्रमाणपत्र
मामले की जांच विशेष कार्य बल (STF) को सौंपी गई थी। STF ने राजस्व रिकॉर्ड, स्थानीय प्रशासन के दस्तावेजों और अन्य प्रमाणों की छानबीन के बाद निष्कर्ष निकाला कि प्रस्तुत निवास प्रमाणपत्र फर्जी था। इन सभी धाराओं में आरोपी को कुल तीन साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया और मामला अदालत तक पहुँचा।
भोपाल की अदालत में चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने दस्तावेजी साक्ष्य और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर यह साबित किया कि आरोपी डॉक्टर ने जानबूझकर फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्र बनवाकर मध्यप्रदेश राज्य कोटे का अनुचित लाभ उठाया। अदालत ने यह भी माना कि इस फर्जीवाड़े के कारण एक वास्तविक पात्र अभ्यर्थी का अधिकार छिन गया।

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