विधि संवाददाता, इंदौर, 23 जनवरी 2026: सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए एक बहुत बड़ी और महत्वपूर्ण कानूनी खबर सामने आ रही है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने सहायक प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में दस्तावेजों को जमा करने की समय सीमा (Cut-off date) को लेकर एक बेहद सख्त और अहम फैसला सुनाया है। माननीय न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई की कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सार्वजनिक भर्ती की प्रक्रिया में किसी भी आधार पर ढील नहीं दी जा सकती।
श्रीमती आराधना बुज का मामला
यह मामला उच्च शिक्षा विभाग में सहायक प्रोफेसर (वनस्पति विज्ञान) के पदों पर भर्ती से जुड़ा है। याचिकाकर्ता, श्रीमती आराधना बुज, जो अनुसूचित जनजाति श्रेणी से आती हैं, ने 2022 के विज्ञापन के तहत परीक्षा दी थी और लिखित परीक्षा में सफल भी रहीं। 4 अक्टूबर 2024 को घोषित परिणाम में उनका नाम मेरिट सूची में 353वें स्थान पर था। विवाद तब शुरू हुआ जब याचिकाकर्ता निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने दस्तावेज जमा करने में विफल रहीं। मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (PSC) ने पहले 25 अक्टूबर 2024 की तारीख तय की थी, जिसे बाद में दो बार विलंब शुल्क के साथ बढ़ाकर 11 नवंबर 2024 कर दिया गया था।
याचिकाकर्ता का तर्क था कि वह 'मिक्स्ड कनेक्टिव टिश्यू डिजीज' (MCTD) नामक गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं, जिसके कारण वह समय पर दस्तावेज नहीं भेज सकीं। उन्होंने कोर्ट से गुहार लगाई थी कि एक मेधावी उम्मीदवार होने के नाते तकनीकी आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद्द नहीं की जानी चाहिए।
हाई कोर्ट की टिप्पणी:
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद लोक सेवा आयोग के पक्ष को सही ठहराया। कोर्ट ने अपने फैसले में कई महत्वपूर्ण बातें कहीं:
1. विज्ञापन की शर्तों के अनुसार, आयोग की वेबसाइट पर नजर रखना और समय पर सूचना प्राप्त करना पूरी तरह से उम्मीदवार की जिम्मेदारी है।
2. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विज्ञापन की शर्तें 'Sacrosanct' (पवित्र/अपरिवर्तनीय) होती हैं और न्यायिक व्याख्या के जरिए उन्हें कमजोर नहीं किया जा सकता।
3. यदि एक उम्मीदवार को व्यक्तिगत या चिकित्सा आधार पर ढील दी जाती है, तो यह उन अन्य उम्मीदवारों के साथ भेदभाव होगा जिन्होंने कठिनाइयों के बावजूद समय सीमा का पालन किया है।
4. अदालत ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक रोजगार में निश्चितता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए सहानुभूति के आधार पर नियमों को नहीं बदला जा सकता।
हाई कोर्ट का अंतिम फैसला: न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि चूंकि चयन प्रक्रिया पहले ही अंतिम दौर में पहुँच चुकी है और सिफारिशें सरकार को भेजी जा चुकी हैं, इसलिए इस स्तर पर प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना गलत होगा। इसी के साथ कोर्ट ने श्रीमती आराधना बुज की याचिका को गुण-दोष के आधार पर खारिज कर दिया है।
यह फैसला उन सभी अभ्यर्थियों एवं उनके परिवार जनों के लिए के लिए एक चेतावनी है जो भर्ती प्रक्रियाओं के दौरान लापरवाह हो जाते हैं।
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