Madhya Pradesh: जिला न्यायालय भर्ती में आरक्षित उम्मीदवारों को माइग्रेशन की अनुमति

जबलपुर, 5 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण के नियमों को लेकर एक बड़ा बदलाव आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 19 दिसंबर 2025 को दिए अपने फैसले में हाईकोर्ट के दो साल पुराने निर्णय को त्रुटिपूर्ण माना है, जिसमें आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को अनारक्षित कैटेगरी में माइग्रेशन की अनुमति नहीं दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर बहस शुरू हो गई है। एक पक्ष का कहना है कि यह संवैधानिक अधिकार है और दूसरे पक्ष का कहना है कि, एक तरफ जाति के आधार पर आरक्षण और दूसरी तरफ योग्यता के नाम पर न्याय की मांग करना उचित नहीं है। यदि किसी उम्मीदवार को अपनी योग्यता पर भरोसा है तो उसे अनारक्षित श्रेणी में फॉर्म भरना चाहिए।

रिवर्स रिजर्वेशन की प्रक्रिया को हाईकोर्ट ने मान्यता दी थी

मामले की शुरुआत मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा 1255 विभिन्न पदों पर की गई भर्ती से हुई। यहां प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट में अनारक्षित वर्ग की कट-ऑफ 78 अंक थी, जबकि ओबीसी वर्ग की 88 अंक। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने याचिका क्रमांक WP/8750/22 सहित दो दर्जन याचिकाओं में दिए फैसले में इस व्यवस्था को सही ठहराया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे प्रथम दृष्टया गलत माना। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि हाईकोर्ट की भर्ती सेल लंबे समय से रिवर्स रिजर्वेशन जैसी प्रक्रिया अपनाती आ रही है, जहां 50 प्रतिशत अनारक्षित पदों को सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित मानकर रिजल्ट तैयार किया जाता है। इससे आरक्षित वर्ग की कट-ऑफ अनारक्षित से ऊंची हो जाती है।

अनारक्षित पद को आरक्षित नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सिविल अपील क्रमांक 14112/2024 में राजस्थान हाईकोर्ट के समान मामले का हवाला देते हुए फैसला सुनाया। राजस्थान में 2756 पदों की भर्ती में अनारक्षित कट-ऑफ 196 अंक और ओबीसी की 230 अंक थी, जिसे असंवैधानिक और आरक्षण विरोधी करार दिया गया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि परीक्षा के किसी भी चरण में अनारक्षित पद किसी जाति या वर्ग विशेष के लिए आरक्षित नहीं किए जा सकते। संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत समानता की भावना को ध्यान में रखते हुए, पहले अनारक्षित पदों पर उन सभी उम्मीदवारों का चयन होगा जो अनारक्षित कट-ऑफ के बराबर या अधिक अंक लाते हैं, चाहे वे किसी भी वर्ग से हों। 

कोर्ट ने इंद्रा शाहनी बनाम भारत संघ, दीपेंद्र यादव बनाम एमपी लोक सेवा आयोग और अलोक कुमार पंडित जैसे पुराने फैसलों को रेखांकित करते हुए कहा कि न्यायपालिका को निष्पक्षता बनाए रखनी चाहिए, ताकि नागरिकों का भरोसा कायम रहे।

मध्य प्रदेश सिविल जज भर्ती 2022 में भी यही विवाद

यह मुद्दा मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की सिविल जज भर्ती 2022 में भी विवाद का केंद्र बना हुआ है। संगठनों द्वारा हाईकोर्ट को ज्ञापन दिए जाने पर पूर्व जस्टिस शील नागू के फैसले का हवाला देकर टाल दिया जाता था। लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सुजय पॉल की डिवीजन बेंच द्वारा याचिका क्रमांक 807/2021 में दिए फैसले को सही माना है, जो मेरिट आधारित माइग्रेशन का समर्थन करता है। इससे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को बिना आयु छूट लिए अनारक्षित सीटों पर मौका मिलेगा, जो उनके आत्मसम्मान और प्रतिभा को सम्मान देगा।

संबंधित अन्य समाचार: 
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने 27 दिसंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट बनाम राजत यादव मामले में इसी सिद्धांत को दोहराया, जहां कहा गया कि खुली सीटें आरक्षित नहीं हैं और मेरिट वाले SC/ST/OBC/EWS उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी में गिना जा सकता है। इससे मध्य प्रदेश के ओबीसी कोटा मामले में भी प्रभाव पड़ सकता है, जहां 27 प्रतिशत आरक्षण पर सुनवाई चल रही है। 

सोशल मीडिया X पर प्रतिक्रियाएं: 

पिछले 24 घंटों में इस विषय पर कई पोस्ट्स देखने को मिले। 
  • प्रशांत कनोजिया ने लिखा, "अगर SC/ST/OBC उम्मीदवार अधिक अंक लाते हैं, तो उन्हें जनरल कैटेगरी में सीट मिलनी चाहिए। आरक्षित कोटे में ही एडजस्ट करने से 13-15 प्रतिशत आबादी के लिए 51 प्रतिशत आरक्षण जैसा हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे सुधारा है, यह न्याय है।" 
  • न्यूज18 ने शेयर किया, "सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षण की उपलब्धता से योग्य SC/ST/OBC उम्मीदवार को मेरिट पर अनारक्षित सीट से वंचित नहीं किया जा सकता।" 
  • राज लछी आईआरएस ने चिंता जताई, "यह फैसला गलत है, क्योंकि आरक्षित उम्मीदवार लाभ लेकर फिर जनरल में आ जाते हैं, जो जनरल कैटेगरी के लिए दोहरी मार है।" 
  • परिहार हिमांशु सिंह ने कहा, "ओपन कैटेगरी मेरिट पूल है, किसी कोटा नहीं। मेरिट को सजा बनाना समाज को पीछे धकेलता है।" 
  • रवि ने इतिहास का जिक्र किया, "जस्टिस पार्टी के समय 100 प्रतिशत आरक्षण था, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट प्रतिशत बढ़ाने नहीं देता।" 
  • पॉलिटिकल कट्टा ने राजस्थान मामले का उल्लेख किया, "सुप्रीम कोर्ट ने कहा, SC/ST/OBC/EWS भी खुली सीटों के लिए पात्र हैं।" 
  • एनडीटीवी इंडिया ने लिखा, "मेरिट में आगे तो जनरल कैटेगरी की नौकरी में भी SC/ST/OBC का हक।" 

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