भोपाल, 18 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश में पदों के विभेदीकरण और कैडर विघटन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ नहीं इसका विरोध करते हुए, इस फैसले को अलोकतांत्रिक बताया है।
मुख्य विवाद : डॉ मोहन यादव सरकार ने प्रदेश के शासकीय विभागों में लंबे समय से स्वीकृत और निर्मित लाखों अस्थाई पदों को 'सांख्येतर' (extra-numerary) घोषित कर उन्हें समाप्त करने का कदम उठाया है। इन पदों में कार्यभारित, आकस्मिकता, संविदा, स्थाईकर्मी और दैनिक वेतन भोगी जैसे कई संवर्ग शामिल हैं।
युवाओं और कर्मचारियों पर प्रभाव:
• बेरोजगारी का संकट: 'राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ' का मानना है कि इस निर्णय से लाखों बेरोजगार युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों के अवसर हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे, जिसे उन्होंने एक अलोकतांत्रिक कार्रवाई करार दिया है।
• कर्मचारियों में असंतोष: लाखों अस्थाई पदों को समाप्त करने के इस कदम से वर्तमान राज्य कर्मचारियों के बीच भी भारी असंतोष व्याप्त है।
वित्त विभाग का आदेश और विरोध: राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकारी संरक्षण संघ ने 22 दिसंबर 2025 को जारी हुए वित्त विभाग के आदेश का कड़ा विरोध किया है। संगठन के प्रदेश प्रमुख, शील प्रताप सिंह पुंढीर ने सरकार के इस फैसले को जल्दबाजी और नासमझीपूर्ण बताया है, जिससे बेरोजगारी बढ़ने की आशंका है।
संगठन की मांगें:
विवाद को सुलझाने के लिए कर्मचारी संगठन ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
1. नियमित सेवा में संविलियन: सांख्येतर घोषित किए गए सभी अस्थाई संवर्गों के पदों को लागू करने से पहले उन्हें नियमित सेवा पदों में शामिल (merger) किया जाए।
2. सेवा संतुलन: विभागीय संरचनाओं की प्रासंगिकता और अस्तित्व बनाए रखने के लिए, जितने अस्थाई पद समाप्त किए गए हैं, उसी अनुपात में तत्काल नियमित पदों को सृजित और स्वीकृत किया जाए।
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