Madhya Pradesh पंचायत कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज़ - लाखों का लाभ होगा, शिवराज सरकार की अपील खारिज

जबलपुर, 18 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश राज्य में जिला पंचायत एवं जनपद पंचायत के कर्मचारियों के लिए गुड न्यूज़ है। हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश के विद्वान न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। यह अपील तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में लगाई गई थी। इसके माध्यम से पंचायत के कर्मचारियों को 2647 दिन का छठवां वेतनमान का लाभ देने से इनकार किया गया था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद पंचायत के कर्मचारियों को 2647 दिनों का बकाया वेतन मिलेगा। 

पृष्ठभूमि
कर्मचारी संतोष एवं अन्य मूल रूप से जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण (DRDA) में नियुक्त हुए थे और बाद में उनकी सेवाओं को जिला पंचायत खरगोन में मिला (Absorb) दिया गया। इनमें से संतोष (प्रतिवादी 1) को अकाउंटेंट और प्रतिवादी 2 को सहायक ग्रेड-II के पद पर पदोन्नत किया गया था। इन कर्मचारियों ने पहले भी 5वें वेतन आयोग के लाभ के लिए याचिका लगाई थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार किया था। इसके बाद, 2010 में विभाग ने जिला पंचायत के कर्मचारियों को भी 6वें वेतन आयोग का लाभ देने के निर्देश जारी किए।

पंचायत कर्मचारियों के साथ पक्षपात

राज्य सरकार ने 2013 में एक आदेश जारी कर कहा कि जिला और जनपद पंचायत के कर्मचारियों को 6वें वेतन आयोग का लाभ 01.04.2013 से दिया जाएगा। जबकि राज्य सरकार के अन्य नियमित कर्मचारियों को यह लाभ 01.01.2006 से मिल रहा था। 

शिवराज सरकार हाई कोर्ट के आदेश को मानने तैयार नहीं थी

कर्मचारियों ने इसके खिलाफ रिट याचिका (W.P. No. 2634/2020) दायर की, जिसे एकल पीठ (Single Judge) ने 3 अक्टूबर 2023 को स्वीकार कर लिया और राज्य को निर्देश दिया कि उन्हें 01.01.2006 से छठवें वेतनमान का लाभ दिया जाए। राज्य सरकार ने इसी आदेश को चुनौती देने के लिए यह रिट अपील दायर की थी। 

हाई कोर्ट में सरकार की दलील

मध्य प्रदेश राज्य सरकार की ओर से, श्री सुदीप भार्गव, उप महाधिवक्ता (Dy.A.G.) ने तर्क दिया कि राज्य ने वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए पंचायत कर्मचारियों को 2013 से लाभ देने का निर्णय लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों ने राज्य के 2013 के उस आदेश को सीधे चुनौती नहीं दी थी, इसलिए एकल पीठ का आदेश गलत है। तर्क दिया गया कि पंचायत कर्मचारियों की सेवा शर्तें राज्य के कर्मचारियों से अलग नियमों (Rules, 1999) द्वारा शासित होती हैं।

कर्मचारियों के वकील की दलील 

कर्मचारियों की ओर से श्री रवींद्र सिंह छाबड़ा (वरिष्ठ अधिवक्ता), श्री विकास जायसवाल और सुश्री प्रनीषा नैयर ने तर्क दिया कि पंचायत एक स्वायत्त निकाय है और जब नियोक्ता (Employer) ने 6वें वेतन आयोग का लाभ देने का निर्णय ले लिया है, तो तिथि में भेदभाव करना मनमाना है। उन्होंने कहा कि समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के तहत उन्हें राज्य के कर्मचारियों के बराबर तिथि से ही लाभ मिलना चाहिए।

MP High Court Decision

✔ हाई कोर्ट (माननीय न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और माननीय न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की खंडपीठ) ने माना कि राज्य सरकार ने पंचायत कर्मचारियों को बाद की तिथि (2013) से लाभ देने का कोई उचित या तार्किक कारण नहीं बताया है।
✔ हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि समान कर्तव्यों का पालन करने वाले कर्मचारियों के बीच वेतन के मामले में भेदभाव करना अनुच्छेद 14 का उल्लंघन और 'समान कार्य के लिए समान वेतन' के सिद्धांत के विरुद्ध है।
✔ कोर्ट ने कहा कि पंचायतें स्वायत्त संस्थाएं हैं और कर्मचारियों को उनके लाभों से वंचित करना मनमाना और भेदभावपूर्ण है।
✔  खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और राज्य सरकार की रिट अपील को खारिज कर दिया।

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