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उपदेश अवस्थी
: फिल्मों और टीवी सीरियल्स ने लड़कियों को शर्मसार करने वाली सार्वजनिक गतिविधियों को सामान्य बना दिया है और ना चाहते हुए भी घर के दरवाजे से लेकर कॉलेज अथवा ऑफिस के अंदर तक लड़कियों और महिलाओं को हर रोज ऐसी गतिविधियों को सहन करना पड़ता है। लेकिन अब जमाना बदल रहा है और ऐसे क्रिमिनल एलिमेंट्स को सबक सिखाने के लिए भारतीय न्याय संहिता 2023 में 5 साल जेल का प्रावधान किया गया है।

BNS-74: Section 74 of the Bhartiya nyaay Sanhita 2023

भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 74 किसी महिला की लज्जा भंग करने के इरादे से उस पर हमला करने या आपराधिक बल का प्रयोग करने से संबंधित है। यह धारा पुराने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354 के स्थान पर प्रतिस्थापित किया गया है। BNS-74 की विस्तृत जानकारी इस प्रकार है: 

BNS-74 के अंतर्गत अपराध की परिभाषा
यदि कोई व्यक्ति:
• किसी महिला पर हमला (Assault) करता है, या
• उसके विरुद्ध आपराधिक बल (Criminal force) का प्रयोग करता है।
यह कार्य इस इरादे से किया गया हो कि उस महिला की लज्जा (Modesty) भंग की जाए, या अपराधी को यह पता हो कि उसके इस कार्य से महिला की लज्जा भंग होने की पूरी संभावना है।

BNS-74 के अपराधी को दंड का प्रावधान

इस अपराध की गंभीरता को देखते हुए इसमें कड़े दंड का प्रावधान है:
• न्यूनतम सजा: एक वर्ष का कारावास।
• अधिकतम सजा: 5 वर्ष का कठोर कारावास।
• जुर्माना: कारावास के साथ अपराधी जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।

महत्वपूर्ण विशेषताएँ

• अपराधी का लिंग: धारा में "जो कोई" (Whoever) शब्द का प्रयोग किया गया है, जिसका अर्थ है कि इस धारा के तहत किसी पुरुष, महिला या ट्रांसजेंडर, किसी को भी अपराधी माना जा सकता है।
• पीडित: इस धारा के तहत सुरक्षा केवल महिलाओं को प्रदान की गई है।
• लज्जा (Modesty): हालांकि 'लज्जा' शब्द को संहिता में परिभाषित नहीं किया गया है, लेकिन सामान्यतः इसे महिला के आत्म-सम्मान और सामाजिक गरिमा से जोड़कर देखा जाता है।

Illustration
• उदाहरण 1: यदि कोई व्यक्ति किसी महिला का हाथ पकड़कर उसे अपनी ओर खींचता है या उसके शरीर को गलत तरीके से छूने का प्रयास करता है, जिससे महिला अपमानित महसूस करती है, तो वह धारा 74 के तहत दोषी होगा।
• उदाहरण 2: किसी सार्वजनिक स्थान पर किसी महिला के कपड़े खींचना या उसके विरुद्ध ऐसे शारीरिक हाव-भाव (Gestures) करना जो उसकी गरिमा को ठेस पहुँचाते हों, इस धारा के अंतर्गत आता है।

संदर्भ और प्रसंग

भारतीय न्याय संहिता के अध्याय V (महिला और बालकों के विरुद्ध अपराध) के तहत इस धारा को रखा गया है। नए कानून (BNS) में महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित प्रावधानों को प्राथमिकता दी गई है और उन्हें संहिता के शुरुआती अध्यायों में ही स्थान दिया गया है ताकि न्याय प्रणाली अधिक 'पीडित-केंद्रित' (Victim-centric) बन सके।

निष्कर्ष एवं अपील: धारा 74 महिलाओं के विरुद्ध होने वाले शारीरिक और मानसिक उत्पीडन को रोकने के लिए एक सशक्त कानूनी हथियार है, जो सुनिश्चित करता है कि महिलाओं की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वालों को अनिवार्य रूप से जेल की सजा मिले। कृपया इसका उपयोग कीजिए। यदि कोई व्यक्ति किसी महिला को तंग कर रहा है तो इस समाचार की लिंक उसको व्हाट्सएप कर दीजिए। आपका यह कदम उसके लिए चेतावनी होगा। यदि वह नहीं जानता तो समझ जाएगा, कितना गंभीर अपराध कर रहा है और उसकी सजा क्या हो सकती है। फिर भी ना माने तो मामला दर्ज करवाइए। ऐसे लोगों को इग्नोर नहीं करना चाहिए। 
लेखक श्री उपदेश अवस्थी पत्रकार एवं विधि सलाहकार हैं।
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