माननीय श्री मुख्यमंत्री जी, मध्यप्रदेश शासन। मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में वर्षों से सेवा दे रहे अतिथि शिक्षक आज इस सिस्टम के लिए केवल “यूज़ एंड थ्रो” की वस्तु बनकर रह गए हैं। जब मन किया रखा गया, जब मन किया निकाल दिया गया। न कोई सेवा सुरक्षा, न भविष्य की गारंटी, न सम्मान। ये शिक्षक जनता के लिए मेहनत करते हैं, सिस्टम के लिए पिसते हैं और बदले में इन्हें केवल अपमान और अनिश्चितता ही मिलती है।
और बात यहीं समाप्त नहीं होती। इससे भी अधिक अमानवीय स्थिति यह है कि अतिथि शिक्षकों को मिलने वाला अत्यंत अल्प मानदेय भी हर माह समय पर नहीं दिया जाता। इसके लिए DPI स्तर से लगभग हर माह आदेश जारी किए जाते हैं कि अतिथि शिक्षकों का मानदेय माह की 10 तारीख तक अनिवार्य रूप से भुगतान किया जाए, जिसके लिए विभाग द्वारा पर्याप्त बजट भी पूर्व में उपलब्ध करा दिया जाता है।
इसके बावजूद निचले स्तर पर कार्यवाही करने वाले कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति उदासीन बने रहते हैं। वरिष्ठ कार्यालय के आदेशों की उन्हें न चिंता होती है, न भय। यह स्थिति लगभग सभी जिलों में देखी जा सकती है।
यदि विशेष रूप से दमोह जिले की बात की जाए, तो वहाँ स्थिति यह है कि मानदेय भुगतान के “अर्जेंट” आदेश होने के बावजूद नवंबर माह का वेतन जनवरी में दिया गया, और दिसंबर माह का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। यह जानते हुए भी कि इतने अल्प मानदेय में जैसे-तैसे जीवन यापन करने वाले शिक्षकों के परिवार की दैनिक आवश्यकताएँ (राशन, पानी, गैस, बच्चों की फीस, दवाइयाँ) सब कुछ इसी मानदेय पर निर्भर है, फिर भी दो-दो माह तक वेतन रोक दिया जाता है।
माननीय मुख्यमंत्री जी, जब समस्त प्रक्रियाएँ ऑनलाइन हो चुकी हैं, हाजिरी ऑनलाइन मान्य है, उसी आधार पर मानदेय का भुगतान होना है और सभी अतिथि शिक्षकों के बैंक खाते भी लिंक हैं, तो जिस प्रकार जिला स्तर से भुगतान किया जाता है, उसी प्रकार विभाग स्तर से सीधे मानदेय का भुगतान क्यों नहीं किया जा सकता?
आपसे निवेदन है कि इस अमानवीय व्यवस्था पर गंभीरता से विचार करें और अतिथि शिक्षकों को समय पर मानदेय तथा सेवा की न्यूनतम सुरक्षा प्रदान करने हेतु ठोस निर्णय लें।
सादर,
एक पीड़ित अतिथि शिक्षक
जिला - दमोह, मध्यप्रदेश
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