You should know: अंतरिक्ष में भयंकर सुपरनोवा विस्फोट, 320 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर से दिखाई दिया

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, न्यू नॉलेज डिपार्मेंट, 15 जनवरी 2026
: जरा सोचिए यदि दिल्ली के आसपास कोई विस्फोट हो और उसकी आग एवं चमक मुंबई से दिखाई दे जाए, तो वह कितना भयंकर विस्फोट होगा। अंतरिक्ष में एक ऐसा भयंकर विस्फोट हुआ है जिसकी चमक 320 मिलियन प्रकाश-वर्ष मतलब 3,02,72,00,00,00,00,00,00,000 किलोमीटर (लगभग 3 सेक्स्टिलियन किलोमीटर) दूर से दिखाई दी है। वैज्ञानिकों द्वारा अपनी आंखों से देखी गई इस घटना का वृतांत पढ़िए:- 

binary black hole का जन्म होने वाला है

खगोलविदों ने एक अत्यंत शक्तिशाली और असामान्य सुपरनोवा विस्फोट (SN 2022esa) को देखा है। ऐसा तब होता है जब हमारे सूर्य जैसे किसी तारे का अंत होता है। यह विस्फोट एक "वोल्फ-रायेट तारे" (Wolf-Rayet star) की मृत्यु के कारण हुआ, जो अपने विकास के अंतिम चरण में था। यह तारा पृथ्वी से लगभग 320 मिलियन प्रकाश-वर्ष दूर '2MFGC 13525' नामक आकाशगंगा में स्थित था। खगोलविदों का मानना है कि इस घटना के बाद बाइनरी ब्लैक होल (binary black hole) की एक जोड़ी के जन्म होगा।

लगभग 1 महीने तक लगातार विस्फोट होते रहे

वैज्ञानिकों ने पाया कि अंतिम महाविस्फोट से पहले, इस प्रणाली में लगभग एक महीने तक चलने वाले समय-बद्ध (periodic) विस्फोट हो रहे थे। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस तरह की स्थिरता केवल एक बाइनरी सिस्टम (दो सितारों वाली प्रणाली) में ही संभव है। 

बाइनरी ब्लैक होल का निर्माण कब होता है

इस खोज से यह सिद्धांत सामने आया है कि यह वोल्फ-रायेट तारा या तो पहले से मौजूद किसी ब्लैक होल के साथ जुड़ा था, या किसी ऐसे विशाल तारे के साथ था जो भविष्य में खुद एक ब्लैक होल बन जाएगा। दोनों ही स्थितियों में, अंतिम परिणाम बाइनरी ब्लैक होल का निर्माण होता है। 

3 सेक्स्टिलियन किलोमीटर दूर की घटना को खगोलविदों ने कैसे देखा

इस खोज के लिए जापान के Seimei टेलिस्कोप और हवाई में स्थित 8.2-मीटर सुबारू (Subaru) टेलिस्कोप का उपयोग किया गया। Seimei टेलिस्कोप ने त्वरित प्रतिक्रिया दी, जबकि सुबारू ने अपनी उच्च संवेदनशीलता से डेटा प्रदान किया।

क्योटो विश्वविद्यालय के शोध दल के अनुसार, यह अध्ययन विशाल तारों के विकास के इतिहास और बाइनरी ब्लैक होल बनने की प्रक्रिया को समझने की दिशा में एक नई दिशा प्रदान करता है। इस शोध को नवंबर में 'फिजिकल रिव्यू लेटर्स' (Physical Review Letters) में प्रकाशित किया गया था। 
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