भोपाल समाचार, 31 जनवरी 2026: कैबिनेट मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय की छुट्टी आज समाप्त हो गई है। इन 10 दिनों में क्या हुआ इसकी चर्चा बाद में करेंगे लेकिन हमने बताया था कि कैलाश जी, ना तो शोक में हैं ना ही शॉक में हैं (यदि नहीं पढ़ पाए थे तो यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं)। आज 31 जनवरी को जब सरकारी जीवन में वापसी का समय आया तो उन्होंने रामायण की एक चौपाई के माध्यम से पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व को एक संदेश दे दिया है। वह चौपाई क्या है, उसके भावार्थ क्या है और राजनीति की दृष्टि से इसका भावार्थ क्या होता है, चलिए सत्संग करते हैं:-
सिया राममय सब जग जानी। करउँ प्रणाम जोरि जुग पानी॥
श्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुबह 8:36 बजे सोशल मीडिया पर रामायण की एक चौपाई लिखी,
सिया राममय सब जग जानी।
करउँ प्रणाम जोरि जुग पानी॥
हमने चेक किया, यह कॉपी पेस्ट नहीं थी। इसमें व्याकरण की गलती भी है। श्री रामचरितमानस में जो लिखा है वह इस प्रकार है:-
सियाराम मय सब जग जानी। करउँ प्रनाम जोरि जुग पानी॥
श्री कैलाश विजयवर्गीय ने "सिया राममय" लिखा है जबकि गोस्वामी तुलसीदास जी ने "सियाराम मय" देखने में इन दोनों के बीच में छोटा सा अंतर है परंतु भावार्थ में यह अंतर काफी बड़ा हो जाता है। यदि जानबूझकर किया जाता है तो यह श्री राम के प्रति एक अपराध भी है, परंतु इसके बारे में बाद में कभी डिस्कस करेंगे। फिलहाल मुद्दे पर रहते हैं।
सियाराम मय सब जग जानी... के विभिन्न भावार्थ और व्याख्या
शाब्दिक अर्थ- मैं सम्पूर्ण जगत को सीता–राम से परिपूर्ण जानकर, दोनों हाथ जोड़कर प्रणाम करता हूँ।
दार्शनिक अर्थ- पूरा संसार चेतना और शक्ति का संयुक्त स्वरूप है। यहां श्रीराम को चेतना और माता सीता को शक्ति का प्रतीक समझा जाता है।
सामाजिक एवं नैतिक अर्थ- किसी का अपमान नहीं करूंगा, जाति, वर्ग और पद का भेद नहीं करूंगा, शत्रु से प्रतिशोध नहीं, उसके चरित्र में सुधार के लिए संघर्ष करूंगा।
साधनात्मक अर्थ - इस चौपाई के माध्यम से साधक कहते हैं कि, जब मन में अहंकार आए तो श्री राम का ध्यान करो, जब मन में क्रोध आए तो माता सीता का ध्यान करो।
सियाराम मय सब जग जानी... का राजनीतिक अर्थ
मैं हर व्यक्ति में ईश्वर का तत्व देखता हूं, सत्ता में रहूं या ना रहूं, वह कभी भ्रष्ट, क्रूर या तानाशाह नहीं बन सकता।
क्या सचमुच कैलाश विजयवर्गीय ने यही कहा है
इस प्रश्न का उत्तर पूछने के लिए हमने श्री कैलाश विजयवर्गीय से संपर्क किया था परंतु वह व्यस्त है। हमने मैसेज कर दिया है यदि वह अपना पक्ष रहेंगे तो हम यहां पर अपडेट कर देंगे। फिलहाल कयास लगा सकते हैं। इस चित्र को देखिए यह 19 जनवरी का है। सबके चेहरे पर जो लिखा है उसको आसानी से पढ़ा जा सकता है।
दरअसल बात यहीं से शुरू हुई थी। जबकि श्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसकी प्लानिंग पहले से कर ली थी। उन्होंने 13 जनवरी को मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से इसका संकेत दे दिया था।
दरअसल बात यहीं से शुरू हुई थी। जबकि श्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसकी प्लानिंग पहले से कर ली थी। उन्होंने 13 जनवरी को मुख्यमंत्री को पत्र के माध्यम से इसका संकेत दे दिया था।
मामला 21 जनवरी को सुर्खियों में आया जब गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथियों की सूची में श्री कैलाश विजयवर्गीय का नाम नहीं था। इसके बाद श्री कैलाश विजयवर्गीय के निज सचिव अभिमन्यु सिंह चौहान द्वारा जारी की गई एक सूचना सोशल मीडिया पर प्रकट हुई जिसमें बताया गया कि, पारिवारिक सदस्य के घर में निधन हो जाने के कारण 10 दिन के शोक में रहेंगे। बाद में यह भी स्पष्ट किया गया कि पारिवारिक सदस्य का नाम श्री केके गोयल है। श्री कैलाश विजयवर्गीय के लिए श्री गोयल का महत्व उतना ही है जितना रमेश मेंदोला का।
खरगोन में ही श्री श्री नजर निहाल आश्रम, थापना में श्री श्री 1008 अवधूत नर्मदानंद बापजी ‘गुरुजी’ से मुलाकात की:-
इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री श्री इंदर सिंह परमार भी उपस्थित थे जिन्होंने हाल ही में कहा था कि मैं कैलाश विजयवर्गी की तरह जल में नहीं फंसूंगा।
इसके अलावा श्री कैलाश विजयवर्गीय भोपाल आए। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यालय "समिधा" पहुंचे और लंबा विचार विमर्श किया।
इसके बाद 30 जनवरी से पहले ही इंदौर में सरकारी कामकाज में लग गए। कांग्रेस पार्टी की क्रिकेट टीम के साथ क्रिकेट खेला। सुमित्रा ताई को महत्व दिया और आज 31 तारीख को श्री रामचरितमानस की यह चौपाई पोस्ट कर दी।
श्री कैलाश विजयवर्गीय, श्री रामचरितमानस की चौपाइयां अक्सर पोस्ट नहीं करते इसलिए भी, इस पोस्ट का अर्थ निकाला जा रहा है। हो सकता है संतों से मुलाकात के दौरान या फिर "समिधा" में शामिल होते समय होने किसी ने यह ज्ञान दिया हो। श्री रामचरितमानस की इस चौपाई के माध्यम से, वर्तमान राजनीति में उनकी भूमिका समझा दी गई हो। और आज इस चौपाई को पोस्ट करके उन्होंने अपनी भूमिका को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक जीवन प्रारंभ करने का संदेश दिया हो। लेखक: उपदेश अवस्थी।

