MP OBC आरक्षण, सुप्रीम कोर्ट में आज की कार्यवाही का विवरण

Updesh Awasthee
नई दिल्ली, 29 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी थी। सभी मामले सीरियल क्रमांक 106 पर थे। पिछली बार सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई नहीं हो पाई थी। इस बार सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोनों पक्षों के वकीलों को कॉल किया गया, यानी बहस करने के लिए बुलाया गया। आईए जानते हैं आज सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ:- 

मध्य प्रदेश सरकार के पांच में से एक भी वकील हाजिर नहीं हुआ

पिछड़ा वर्ग पक्ष की अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि, आज दिनांक 29/01/26 को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस नरसिम्हा तथा जस्टिस विजय विश्नोई की खंडपीठ में फाइनल बहस के लिए 106 नंबर पर सूचीबद्ध थे, लेकिन आज मध्य प्रदेश सरकार का दुहरा चरित्र फिर सामने आया है। जब मामले सुनवाई हेतु कॉल हुए तो मध्य प्रदेश सरकार की ओर से एक भी वकील कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। जबकि मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता सहित पांच वरिष्ठ वकील हायर किए गए हैं। 

अधिवक्ता श्री सिंह का कहना है कि, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से महाधिवक्ता द्वारा ओ.बी.सी. आरक्षण के समस्त प्रकरण सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर करा दिए गए हैं। मध्य प्रदेश सरकार भर्ती के सभी विज्ञापन ओ.बी.सी. को 27% आरक्षण दिए जाने का प्रकाशित करते आ रही है, तथा 13% पद नियम विरुद्ध होल्ड किए जा रहे हैं। सरकार का कहना है कि जैसे ही सुप्रीम कोर्ट से मामले निराकृत होंगे ओ.बी.सी. को 27% आरक्षण लागू कर दिया जाएगा लेकिन सरकार की आज मंशा साफ हो गई है कि सरकार ओ.बी.सी. को 27% आरक्षण देना ही नहीं चाहती। जबकि ओ.बी.सी. का 27% आरक्षण के कानून पर न तो हाईकोर्ट ने स्टे किया है और न ही सुप्रीम कोर्ट ने। 

सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी मामले की अगली तारीख

श्री सिंह ने बताया कि, जब आज मामले सुनवाई के लिए कॉल हुए तो ओ.बी.सी. वर्ग के पैरोकार वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप जार्ज चौधरी, वरिष्ठ अधिवक्ता जून चौधरी, मैं स्वयं एवं वरुण ठाकुर उपस्थित हुए तथा प्रकरणों की गंभीरता के संबंध में कोर्ट को अवगत कराया गया कि विगत 06 वर्षों से लाखों युवा बेरोजगार सफर करते आ रहे हैं, तब कोर्ट ने ऑब्जर्व किया कि मध्य प्रदेश सरकार की ओर से तो एक भी अधिवक्ता मौजूद नहीं है, तब कोर्ट ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि आपके मित्र अधिवक्ता उपस्थित ही नहीं हो रहे हैं, फिर कोर्ट मामलों की सुनवाई कैसे कर सकती है? तब ओ.बी.सी. पक्ष पैरोकारों ने निवेदन किया कि मामलों को आगामी 04 फरवरी को नियत कर दिए जाएं।

#buttons=(Ok, Go it!) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Check Now
Ok, Go it!