इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय की भागीरथपुरा में दूषित पानी से लोगों की मौत का सिलसिला जारी है और अब उनके समर्थक रमेश मेंदोला की विधानसभा से यह वीडियो सामने आया है। यह वीडियो इंदौर के लाहूजी नगर का है, जो विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 के अंतर्गत आता है। श्री रमेश मेंदोला यहां के विधायक हैं। वीडियो उसी पत्रकार (अनुराग द्वारे) द्वारा वायरल किया गया है, जिसे घंटा कहा गया था। अब पत्रकार घंटा बजा रहा है।
यह वीडियो इंदौर के लाहूजी नगर का है, जो विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 के अंतर्गत आता है। श्री रमेश मेंदोला यहां के विधायक हैं। वीडियो उसी पत्रकार (अनुराग द्वारे) द्वारा वायरल किया गया है, जिसे घंटा कहा गया था। अब पत्रकार घंटा बजा रहा है। #indore pic.twitter.com/85JLX0qUZW
— Adhiraj Awasthi (@AdhirajOnline) January 26, 2026
इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2 की समस्याएं
इंदौर विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 2, जिसे अक्सर रमेश मेंदोला का अभेद्य किला माना जाता है, विकास के साथ-साथ कुछ बुनियादी और पुरानी समस्याओं से भी जूझ रहा है। इस क्षेत्र में मध्यम और निम्न-मध्यम वर्गीय आबादी अधिक है, इसलिए समस्याएँ भी रोज़मर्रा के जीवन से जुड़ी हैं।
1. जल प्रदूषण और पेयजल
हाल के समय (जनवरी 2026) में इंदौर के कुछ हिस्सों, विशेषकर विधानसभा 1 और 2 के सीमावर्ती इलाकों (जैसे भागीरथपुरा) में दूषित पानी की आपूर्ति एक गंभीर मुद्दा बनी है। पाइपलाइनों के पुराने होने और सीवरेज लाइन में लीकेज के कारण पीने के पानी में गंदा पानी मिलने की शिकायतें आती रहती हैं।
2. सघन आबादी और संकरी सड़कें
ट्रैफिक जाम: परदेशीपुरा, कुलकर्णी भट्टा और बाणगंगा जैसे क्षेत्रों में सड़कें आबादी के अनुपात में संकरी हैं। भारी वाहनों की आवाजाही और ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या के कारण यहाँ अक्सर जाम की स्थिति रहती है।व्यावसायिक क्षेत्रों और घनी बस्तियों में पार्किंग के लिए जगह न होने के कारण लोग सड़कों पर वाहन खड़े करते हैं, जिससे समस्या और बढ़ जाती है।
3. पुरानी सीवरेज व्यवस्था
इस क्षेत्र की कई कॉलोनियाँ पुरानी हैं, जहाँ ड्रेनेज सिस्टम अब लोड नहीं झेल पा रहा है। बारिश के समय सड़कों पर पानी भर जाना और ड्रेनेज चोक होना यहाँ की एक स्थायी समस्या रही है।
4. औद्योगिक प्रदूषण
यह क्षेत्र औद्योगिक इलाकों (जैसे सांवेर रोड का हिस्सा) के करीब है। यहाँ स्थित कुछ फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और कचरे के कारण आस-पास की रिहायशी बस्तियों (जैसे कुशवाह नगर, लाहूजी नगर) में वायु और जल प्रदूषण का असर देखा जाता है।
5. स्वास्थ्य और शिक्षा सुविधाओं पर दबाव
आबादी अधिक होने के कारण सरकारी अस्पतालों और स्कूलों पर बहुत अधिक दबाव है। हालांकि मोहल्ला क्लीनिक और संजीवनी क्लीनिक खुले हैं, लेकिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए लोगों को आज भी एम.वाई. अस्पताल (M.Y. Hospital) या निजी अस्पतालों पर निर्भर रहना पड़ता है।
6. आवारा पशुओं की समस्या
लाहूजी नगर और बाणगंगा जैसे इलाकों में आवारा पशुओं (खासकर कुत्तों और मवेशियों) के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
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