Europe पहले घूमने जाते थे अब पैसा कमाएंगे, पहली बार व्यापार और पर्यावरण एक साथ

Updesh Awasthee
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच 18 साल की लंबी बातचीत के बाद एक बड़ा व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) हुआ है। आसान भाषा में कहें तो यह दो बड़े बाज़ारों के बीच हाथ मिलाने जैसा है, जिसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था के अलावा पर्यावरण पर भी पड़ेगा। क्लाइमेट के पत्रकार श्री निशांत सक्सेना की रिपोर्ट पर आधारित यह विश्लेषण पढ़िए:-

इस पूरे मामले को आप इन आसान बिंदुओं में समझ सकते हैं:

सामान सस्ता होगा तो व्यापार बढ़ेगा: भारत और यूरोप के बीच अभी लगभग 124 अरब यूरो का कारोबार होता है, जिसे आने वाले समय में दोगुना करने का लक्ष्य है। इस समझौते के तहत 90 प्रतिशत से ज़्यादा चीज़ों पर टैक्स (टैरिफ) कम कर दिया जाएगा या हटा दिया जाएगा। इसका मतलब है कि भारत का सामान यूरोप में और यूरोप का सामान भारत में सस्ता मिलेगा, जिससे किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए नए बाज़ार खुलेंगे। 

पहली बार व्यापार और पर्यावरण एक साथ: यह सिर्फ पैसे का लेन-देन नहीं है। पहली बार व्यापार और पर्यावरण (क्लाइमेट) को एक साथ जोड़ा गया है। अब दोनों पक्ष मिलकर साफ ऊर्जा (Clean Energy) जैसे कि सोलर पावर और ग्रीन हाइड्रोजन पर काम करेंगे। भविष्य में ऐसी मशीनों और तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा जिनसे प्रदूषण कम हो। 

प्रदूषण पर जुर्माना या कार्बन टैक्स: यूरोप ने एक नया नियम बनाया है जिसे 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज़्म' कहते हैं। सरल शब्दों में, अगर भारत में बनी किसी चीज़ (जैसे लोहा या सीमेंट) को बनाने में बहुत ज़्यादा प्रदूषण हुआ है, तो यूरोप उस पर अतिरिक्त टैक्स लगा सकता है। हालांकि, इस समझौते के ज़रिए दोनों पक्ष इस पर बात कर रहे हैं ताकि भारतीय उद्योगों और निर्यातकों पर इसका बुरा बोझ न पड़े।

Infrastructure: यूरोपीय निवेश बैंक भारत में ऐसे निर्माण कार्यों (सड़क, पुल आदि) के लिए पैसा लगाने को तैयार है जो बाढ़ या अन्य प्राकृतिक आपदाओं को झेल सकें। इससे गाँवों और शहरों में बेहतर और सुरक्षित सुविधाएं बनेंगी। 

एक-दूसरे की ज़रूरत: आज की दुनिया में जब कई देशों के बीच तनाव चल रहा है, भारत और यूरोप ने एक-दूसरे को भरोसेमंद साथी माना है। यूरोप को अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए भारत जैसे देश की ज़रूरत है, और भारत को अपनी नई इंडस्ट्रीज़ के लिए यूरोप की तकनीक और निवेश की। 

निष्कर्ष: यह समझौता आम आदमी के लिए नई नौकरियों के अवसर, किसानों के लिए बड़ा विदेशी बाज़ार और आने वाली पीढ़ी के लिए साफ हवा-पानी (क्लीन टेक के ज़रिए) सुनिश्चित करने की एक बड़ी कोशिश है। अब व्यापार का मतलब सिर्फ मुनाफ़ा नहीं, बल्कि पर्यावरण के प्रति ज़िम्मेदारी भी होगा।
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