BIG NEWS - UGC नियम बनाने वालों ने भी विरोध किया, बोले हम नहीं है जिम्मेदार

Updesh Awasthee
भोपाल समाचार, 29 जनवरी 2026
: भेदभाव को मिटाने के लिए और बड़ा भेदभाव पैदा करने वाले UGC Equity Regulations 2026 के मामले में नए नियमों की सिफारिश करने वाली संसदीय स्थाई समिति के अध्यक्ष श्री दिग्विजय सिंह ने, नए नियमों का विरोध किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमने इस प्रकार की सिफारिश नहीं की थी। जो भी छेड़खानी की गई है वह यूजीसी या शिक्षा मंत्रालय के स्तर पर की गई है। 

UGC Equity Regulations 2026 में भाजपा की भूमिका

यदि आप केवल सोशल मीडिया देखेंगे तो मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा के सदस्य श्री दिग्विजय सिंह, भाजपा के कट्टर दुश्मन दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है जैसे यदि श्री दिग्विजय सिंह भूख से तड़प रहे हों, भाजपा के पास अन्न के भंडार भरे हों, तब भी भाजपा श्री दिग्विजय सिंह की मदद नहीं करेगी। लेकिन असलियत देखिए, सरकार ने UGC Equity Regulations 2026 बनाने के लिए जी संसदीय समिति का गठन किया उसमें श्री दिग्विजय सिंह को अध्यक्ष बनाया है। 

UGC Equity Regulations 2026 में दिग्विजय सिंह की भूमिका

संसदीय स्थायी समिति (Parliamentary Standing Committee on Education, Women, Children, Youth and Sports) का मुख्य काम UGC के ड्राफ्ट रेगुलेशंस (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2025) की समीक्षा करना, उन पर विचार-विमर्श करना और सरकार/UGC को सिफारिशें देना था। यह समिति संसद की एक विभागीय स्थायी समिति है, जिसका उद्देश्य शिक्षा मंत्रालय और संबंधित विभागों (जैसे UGC, AICTE आदि) के कामकाज की जांच करना, नीतियों/ड्राफ्ट नियमों की जांच करना और संसद में रिपोर्ट पेश करना होता है। UGC विवाद के संदर्भ में इस समिति ने विशेष रूप से उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव (caste-based discrimination) रोकने वाले UGC के ड्राफ्ट नियमों (2025) की जांच की थी।

मतलब स्पष्ट है, संसदीय स्थायी समिति मैं नियमों का ड्राफ्ट नहीं बनाया बल्कि ड्राफ्ट की जांच की और सरकार को सिफारिश की। श्री दिग्विजय सिंह और उनकी समिति ने सरकार को बताया कि नियमों में क्या होना चाहिए और क्या नहीं होना चाहिए। 

अब दिग्विजय सिंह क्या कहते हैं

संसदीय समिति के अध्यक्ष एवं राज्यसभा के सदस्य श्री दिग्विजय सिंह ने भोपाल में अपने मित्र पत्रकार को बुलाकर अपना पक्ष प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि हमने जो सिफारिश की थी, UGC ने उसकी पूरी तरह से स्वीकार नहीं किया बल्कि कई अहम सुझावों को UGC ने खुद नजरअंदाज किया है। श्री दिग्विजय सिंह का कहना है कि यह जो नियम जारी हुए हैं इसके लिए संसदीय समिति नहीं बल्कि UGC और सरकार का शिक्षा मंत्रालय जिम्मेदार है। 

दिग्विजय सिंह ने यह बयान क्यों दिया

UGC Equity Regulations 2026 खिलाफ देश भर में गुस्सा उबल रहा है। स्वाभाविक है कि उनके वंश के बच्चों को भी इसी भेदभाव का शिकार होना पड़ेगा। परिवार नाराज है, रिश्तेदार नाराज हैं और अनारक्षित जातियों के समर्थक भी नाराज हैं। कमेटी के अध्यक्ष होने के नाते जो करना था वह तो कर ही दिया है। अब पब्लिक में अपनी इमेज को बैलेंस करने के लिए बयान जारी कर दिया। ताकि कहा जा सके कि जो नियम मैंने बनाए हैं, वह नियम मैं नहीं बनाए। भारत में वैसे भी पब्लिक डॉक्यूमेंट पर सिग्नेचर चेक नहीं करती, मीडिया में दिया गया बयान चेक करती है। काम भी हो गया और कलंक भी नहीं लगा। 

अब दिग्विजय सिंह और क्या कर सकते हैं

श्री दिग्विजय सिंह अभी भी संसदीय समिति के अध्यक्ष हैं। उन्होंने बड़ी चतुराई के साथ अपने ऊपर लगने वाले आरोपों को बड़ी चतुराई के साथ UGC और शिक्षा मंत्रालय की तरफ डायवर्ट कर दिया है। यह दोनों संस्थान है। पब्लिक यदि किसी संस्था से नाराज हो भी जाए तो क्या फर्क पड़ता है। लेकिन यदि श्री दिग्विजय सिंह सचमुच यूजीसी के नए नियमों से संतुष्ट नहीं हैं, जैसा कि उन्होंने कहा कि उनकी सिफारिश को स्वीकार नहीं किया गया। उनके साथ ऐसी छेड़छाड़ की गई, जो पूरे विवाद की वजह बन गई, तो श्री दिग्विजय सिंह को UGC और शिक्षा मंत्रालय का बिल्कुल वैसा ही विरोध करना चाहिए जैसा RSS का करते हैं और संसदीय समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। ऐसी समिति का अध्यक्ष रहने का क्या फायदा। 
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