भोपाल, 4 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह से फेल कर गया है। छिंदवाड़ा में खांसी की दवाई से बच्चों की मौत और इंदौर में नर्मदा जल से लोगों की मौत के बाद भोपाल में फफूंद लगी दवाइयों से लोगों की मौत हो रही है। इस मामले में मरने वालों की संख्या प्रमाणित नहीं हुई है लेकिन दवाइयों में फफूंद का खुलासा हो गया है। फिलहाल कोई जांच रिपोर्ट नहीं है जो यह बताती हो कि कितने मरीज को इस प्रकार की दवाइयां का वितरण किया गया और उनमें से कितने जिंदा बचे हैं।
सरकारी अस्पताल की फार्मेसी से फफूंद लगी दवाइयों का वितरण
मामला केवल भोपाल या मध्य प्रदेश का नहीं है। केवल इतना कहा जा सकता है कि मामले का खुलासा भोपाल के सरकारी जिला चिकित्सालय (जेपी हॉस्पिटल) में हुआ है। एक मरीज श्री सतीश सेन शुक्रवार शाम की ओपीडी में हड्डी रोग विशेषज्ञ को दिखाने पहुंचा। पैर में फ्रेक्चर की आशंका जताते हुए डॉक्टर ने एक्सरे और दर्द की दवा लिखी। मरीज ने अस्पताल की फार्मेसी से दवा ली, जिसमें फफूंद लगी हुई थी। इसी शिकायत मरीज ने मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनीश शर्मा को ईमेल के मध्यम से भी की है। साथ ही दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम लिमिटेड जिम्मेदार
ज्यादातर लोग दवाइयों की इतनी गहराई से निगरानी नहीं करते। यदि कोई सफेद पाउडर दिखाई देता है तो उसे फफूंद नहीं बल्कि दवाई का हिस्सा मानकर खा जाते हैं, लेकिन कुछ मरीज जागरूक होते हैं। एक मरीज ने मामला पकड़ लिया। सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई और उनकी गुणवत्ता की जिम्मेदारी मध्य प्रदेश लोक स्वास्थ्य सेवा निगम लिमिटेड (MPPHSCL) की है। MPPHSCL के जरिये सेंट्रल फार्मेसी से मांग आने पर जिला एवं अन्य अस्पतालों को दवा सप्लाई की जाती है।
The diclofenac 50 mg tablets contain mold
मरीज सतीष को जो दवा की स्ट्रिप दी गई है, उस पर एक्सपायरी डेट जून 2027 लिखी हुई है। यह दर्द में दी जाने वाली डिक्लोफेनाक 50 एमजी की टैबलेट है। जिसका बैच नंबर DSM 25002 है। यह दवा MPPHSCL के द्वारा 27 अक्टूबर 2025 को जेपी अस्पताल को मुहैया कराई गई थी।
पंकज शुक्ला (NHM के पूर्व संचालक डॉ)
फफूंद लगी दवाएं सेवन करने से संक्रमण, एलर्जी, लिवर और किडनी को नुकसान जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। खासतौर पर दर्द निवारक और एंटीबायोटिक दवाओं में फंगस बेहद खतरनाक हो सकता है।
मोरल ऑफ़ द स्टोरी
इस प्रकार के मामले को किसी एक फार्मेसी, किसी एक अस्पताल, किसी एक जिला या किसी एक कंपनी का मामला मानकर शांत नहीं रहना चाहिए बल्कि तुरंत अपने स्तर पर चेक करना चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं की मध्य प्रदेश के पूरे बाजार में इस प्रकार की दवाइयों की सप्लाई हुई है। सरकार से मांग की जानी चाहिए कि वह इस मामले में अधिकतम विस्तृत जांच करें। यह भी पता लगाएं कि यह दवाई कितने लोगों को दी गई है और अब उनका स्वास्थ्य कैसा है।
यदि खांसी की दवाई और दूषित पानी पीने से लोगों की मौत हो सकती है। इम्यूनिटी इतनी कम हो गई है तो फिर इस बात की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता की फफूंद लगी हुई टेबलेट खाने से भी लोगों की मौत हो सकती है।
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