BHOPAL कलेक्टर सहित तीन अधिकारियों का सुप्रीम कोर्ट में right to reply खत्म, पेड़ों की अवैध कटाई का मामला

भोपाल, 9 जनवरी 2026
: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पीडब्ल्यूडी डिपार्टमेंट द्वारा पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ा अपडेट मिला है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी करके जवाब मांगा था। भोपाल कलेक्टर, लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के संचालक ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब प्रस्तुत नहीं किया। अब सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष नहीं सुना जाएगा। उनका जवाब देने का अधिकार खत्म कर दिया गया है।

शाहपुरा, भोपाल के सान्निध्य जैन ने लगाई जनहित याचिका

शाहपुरा के निवासी सान्निध्य जैन, जो law student हैं, ने बताया कि Public Works Department (PWD) द्वारा शैतानसिंह मार्केट चौराहा से मनीषा मार्केट, बंसल अस्पताल, स्वर्णजयंती पार्क, बावड़ियाकला तिराहा से कोलार रोड तक road widening का काम चल रहा है। इस project में 250 से ज्यादा हरे-भरे पेड़ों को काटने की तैयारी हो चुकी है। पेड़ों पर red ink से numbers mark कर दिए गए हैं, लेकिन आरोप है कि department ने पेड़ों की actual संख्या छिपाने के लिए कई trees पर एक ही number डाल दिया। PWD के राजधानी संभाग number-one ने सिर्फ 132 पेड़ों की कटाई बताई है, जबकि reality में यह संख्या कहीं ज्यादा है।

PWD BHOPAL ने NGT में false statement दिया

विभाग के executive engineer ने इन पेड़ों को काटने के लिए municipal corporation के assistant commissioner (gardens) को permission के लिए 2 April 2024 को application दिया था। इसके साथ प्रत्येक पेड़ की कीमत 6,000 रुपये मानते हुए 7,92,000 रुपये का demand draft भी attach किया गया। लेकिन सान्निध्य का कहना है कि यह सब illegal तरीके से हो रहा है, क्योंकि department ने NGT में false statement दिया कि road बनने के बाद both sides और central verge पर new plants लगाए जाएंगे। लेकिन ground पर paver blocks लगा दिए गए हैं, जहां पेड़ लगाने का space ही नहीं बची।

अधिकारियों ने जवाब देने वकील तक नहीं भेजें

हरियाली को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। याचिका में department पर illegal tree cutting और misleading information देने का आरोप लगाया गया। Supreme Court ने officials को notice जारी किया, लेकिन 5 January की hearing में Bhopal collector, PWD chief engineer और Town and Country Planning director के lawyers तक नहीं पहुंचे। Municipal corporation और pollution control board के representatives ने time मांगा, जिस पर court के registrar ने उन्हें 12 January तक affidavit जमा करने का order दिया। 

अनुपस्थित अधिकारियों का right to reply खत्म

Petitioner के advocate अंशुल गुप्ता ने कहा कि जो officers present नहीं हुए, उनका right to reply खत्म हो गया है। यह decision पर्यावरण protection के लिए एक strong message है, जो officials को जवाबदेह बनाता है।

इस विषय से जुड़े अन्य अपडेट

हाल ही में Madhya Pradesh High Court ने Bhopal में tree felling पर ban extend किया है, जहां state government को compensatory plantation के details देने को कहा गया। एक report के अनुसार, PWD ने NGT permission के 488 trees illegal तरीके से काटे और court ने state से better affidavit मांगा। इसके अलावा, NGT ने Kolar six-lane road के लिए 4,105 trees काटने पर records मांगे, और Bhopal की air quality पर भी सवाल उठाए, जहां Shahpura में monitoring stations के आसपास water spraying से data manipulate करने के आरोप हैं। इन developments से लगता है कि Bhopal में greenery protection की fight और तेज हो रही है।

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