भोपाल समाचार, 17 जनवरी 2026: असलम चमड़ा की पावर दिखाई देने लगी है। लैब टेस्टिंग में BEEF की पुष्टि हो जाने के बाद जब हंगामा हुआ तो स्लॉटर हाउस को सील कर दिया गया और कुछ कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया लेकिन इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई। खबर मिली है कि स्लॉटर हाउस के अंदर नियमित रूप से गए काटे जाने के सबूत मिटा दिए गए हैं। जबकि नगर निगम की ओर से कोई जांच शुरू नहीं हुई है। ना सैंपलिंग हुई है ना ही फॉरेंसिक जांच हुई है।
ना तो फॉरेंसिक टीम आई नहीं स्लॉटरिंग एरिया की सैंपलिंग हुई
जानकारी के मुताबिक स्लॉटर हाउस में गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की शिकायतों के बाद कार्रवाई की गई थी। इसके बावजूद अब तक न तो फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और न ही स्लॉटरिंग एरिया से सैंपल लेकर जांच की गई। जानकारों का कहना है कि अगर समय रहते फॉरेंसिक जांच होती तो कई अहम तथ्य सामने आ सकते थे।
CCTV की रिकॉर्डिंग कहा गई?
मामले में यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या स्लॉटर हाउस में CCTV कैमरे चालू थे और अगर थे तो उनकी रिकॉर्डिंग कहां है। साथ ही यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि नगर निगम के पास स्लॉटर हाउस संचालन से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज और अनुमतियां थीं या नहीं।
केवल सीलिंग और सस्पेंशन से मामला ठंडा नहीं होगा
विपक्ष और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि पूरे मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। उनका कहना है कि केवल सीलिंग और निलंबन से जिम्मेदारी पूरी नहीं होती, बल्कि पारदर्शी और वैज्ञानिक जांच जरूरी है। अब निगाहें प्रशासन और पुलिस पर टिकी हैं कि वे फॉरेंसिक जांच कब कराते हैं और स्लॉटर हाउस से जुड़ी अनियमितताओं की पूरी सच्चाई जनता के सामने कब आएगी।
इस न्यूज़ के साथ यह बताना भी जरूरी है कि मामले के मुख्य आरोपी असलम चमड़ा को बड़े और प्रभावी राजनीतिक संरक्षण की खबरें लोकल मीडिया में प्रकाशित होने लगी है। इससे पहले लड़कियों को नशे का शिकार और ब्लैकमेल करके रेप करवाने वाले मछली गैंग का भी पॉलीटिकल कनेक्शंस सामने आया था।
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