भोपाल, 5 जनवरी 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में गरीबों के लिए भगवान का दूसरा नाम डॉक्टर रश्मि, 24 दिन तक मौत से संघर्ष करने के बाद आज जीवन की डोर छोड़ गई। हेड ऑफ़ द डिपार्टमेंट मोहम्मद यूनुस द्वारा प्रताड़ित किए जाने के बाद डॉक्टर रश्मि वर्मा ने आत्महत्या का प्रयास किया था। मोहम्मद यूनुस अभी भी पावर में है, उसके खिलाफ कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया गया है।
AIIMS BHOPAL ड्यूटी से लौटते ही सुसाइड अटेंप्ट किया
12 दिसंबर 2025 को, डॉ रश्मि वर्मा ने ड्यूटी के बाद घर जाकर एक हाई डोज इंजेक्शन खुद को लगाया। वे अस्पताल से IV cannula लगवाकर घर गई थीं, जिससे दवा सीधे नसों में पहुंच गई। कुछ ही मिनटों में उनका शरीर प्रभावित हो गया, और वे बेहोश हो गईं। उनके पति डॉ मनमोहन शाक्य ने उन्हें तुरंत AIIMS वापस लाया, लेकिन तब तक उनका दिल धड़कना बंद हो चुका था। इमरजेंसी में डॉक्टरों ने तीन बार CPR दिया, और करीब 7 मिनट बाद heartbeat वापस आई। लेकिन इतने समय तक brain को oxygen नहीं मिला, जिससे serious brain damage हो गया।
global hypoxic brain injury हो गई थी
घटना के 72 घंटे बाद, 15 दिसंबर को MRI टेस्ट हुआ, जिसमें global hypoxic brain injury की पुष्टि हुई। इसका मतलब है कि पूरे मस्तिष्क को लंबे समय तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिला, और brain cells बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं। डॉक्टरों ने बताया कि ऐसी स्थिति cardiac arrest या severe respiratory failure के बाद होती है, और recovery की उम्मीद बहुत कम रहती है। डॉ रश्मि को ventilator पर रखा गया, और हर दिन उनकी condition monitor की जा रही थी। लेकिन reports निराशाजनक रहीं।
AIIMS भोपाल में toxic work culture, डॉ मोहम्मद यूनुस आरोपी
इस बीच, AIIMS भोपाल में toxic work culture पर सवाल उठे। डॉ रश्मि को ट्रॉमा एंड इमरजेंसी विभाग के HOD डॉ मोहम्मद यूनुस से प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। उन्हें serious misconduct का notice मिला था, जिसमें बिना appointment के HOD से मिलने पर रोक थी। इसी stress से तंग आकर उन्होंने suicide attempt किया। विभाग में गुटबाजी, notice culture और administrative pressure की शिकायतें पहले भी थीं। एक अन्य डॉक्टर श्रुति ने भी डॉ यूनुस के खिलाफ complaint की थी, जो pending थी।
15 दिसंबर को high-level committee गठित हो गई थी
15 दिसंबर को, छुट्टी के दिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और AIIMS management की emergency meeting हुई। इसमें फैसले लिए गए: डॉ यूनुस को HOD पद से हटा दिया गया, और उन्हें anaesthesia department में attach किया गया। ट्रॉमा एंड इमरजेंसी को दो हिस्सों में बांटा गया - ट्रॉमा अब neurosurgery के under डॉ अमित अग्रवाल के leadership में, और इमरजेंसी medicine department के under डॉ रजनीश जोशी के। साथ ही, high-level committee बनाई गई, जो गोपनीय जांच करेगी। जांच में workplace stress, departmental politics और पुरानी complaints को देखा जाएगा। AIIMS ने nephrology और ophthalmology departments में भी similar issues की जांच शुरू की। आज 5 जनवरी 2026 तक इसकी कोई रिपोर्ट नहीं आई है। स्पष्ट के मामले को टाल दिया जा रहा है।
justice for Dr Rashmi
23 दिनों तक ventilator पर रहने के बाद, आज 5 जनवरी 2026 को डॉ रश्मि की मौत हो गई। AIIMS officials ने confirm किया कि expert supervision के बावजूद उनकी condition improve नहीं हुई। यह घटना AIIMS Bhopal toxic work culture पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, और उम्मीद है कि जांच से justice मिलेगा।
अपनी सैलरी से गरीबों का इलाज करती थी
भगवान परिवेश में जब डॉक्टर एक बिजनेसमैन की तरह अपनी पढ़ाई पर इन्वेस्टमेंट और रिटर्न की बात करते हैं, डॉक्टर रश्मि गरीबों के लिए भगवान का दूसरा नाम थी। एक तो डॉक्टर रश्मि खुद काफी योग्य और प्रतिभावान डॉक्टर थी। रिसर्च के लिए उन्हें कहीं पुरस्कार भी मिल चुके थे। देश में उनका नाम और सम्मान था। वहीं दूसरी ओर वह अपनी सैलरी से गरीबों के लिए दवाइयां खरीद लेती थी, और इसके बदले में सोशल मीडिया पर कोई अपडेट भी नहीं करती थी।
अन्य संबंधित जानकारी: इस मामले ने पूरे देश में healthcare professionals के mental health पर debate छेड़ दिया है। AIIMS ने high-level probe order की है, जो departmental harassment और private practice pressure जैसे issues को cover करेगी। अगर आप Dr Rashmi Verma AIIMS Bhopal case के बारे में कुछ और जानते हैं तो कृपया हमें व्हाट्सएप, टेलीग्राम या ईमेल के माध्यम से बताएं। हम गोपनीयता की शर्तों का पालन करते हैं।
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