AI मतलब झोलाछाप डॉक्टर, SE Ranking की रिसर्च रिपोर्ट

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टेक्नोलॉजी न्यूज़ डिपार्मेंट, 26 जनवरी 2026
: AI बोले तो ChatGPT, Google Gemini इत्यादि को लोगों ने अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया है। पर्सनल रिलेशनशिप से लेकर मेडिकल तक हर तरह की एडवाइस के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग किया जा रहा है लेकिन, SE Ranking की रिसर्च में एक बड़ा खुलासा हुआ है। AI एक झोलाछाप डॉक्टर की तरह मेडिकल एडवाइस देता है। क्योंकि इस मामले में उसके गुरु गुड़ हैं, इसलिए AI गोबर हो गया। बात समझ में नहीं आई तो डिटेल में पढ़िए:- 

इस टॉपिक पर स्टडी की जरूरत क्यों पड़ी

रिसचर्स का कहना है कि दुनिया भर में लाखों लोग AI से अपनी हेल्थ के संबंध में एडवाइस ले रहे हैं। इसलिए यह एक बेहद गंभीर विषय बन गया है। पुष्टि के लिए हमने ChatGPT से पूछा तो उसने बताया कि, हाँ, स्वास्थ्य संबंधी सवाल यहाँ बहुत आम हैं, लोग आम तौर पर स्वास्थ्य, बीमारी के लक्षण, दवाइयाँ, घर पर उपचार, आहार, फिटनेस और मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर प्रश्न पूछते हैं। ChatGPT ने प्रश्न पूछने वाले यूजर्स की संख्या या प्रतिशत बताने से इनकार कर दिया। 

Google Gemini ने ज्यादा ईमानदारी से जवाब दिया

Google Gemini ने बड़ी ईमानदारी से बताया कि लगभग 15 प्रतिशत यूजर्स स्वास्थ्य संबंधी सवाल पूछते हैं। Gemini ने कहा कि लोग अक्सर अपने स्वास्थ्य (Health) से जुड़े सवाल मुझसे पूछते हैं। यह एक बहुत ही सामान्य विषय है क्योंकि आजकल लोग अपनी जीवनशैली, डाइट और सामान्य बीमारियों के बारे में तुरंत जानकारी चाहते हैं। इसके साथ Gemini नहीं यह भी जोड़ा कि, मैं सभी प्रश्नों के उत्तर देता हूं परंतु यह भी बताता हूं कि, मेरी दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी गंभीर स्थिति, दवा बदलने या नई डाइट शुरू करने से पहले एक पेशेवर डॉक्टर (Medical Professional) से सलाह लेना अनिवार्य है। 

कुल मिलाकर यह स्पष्ट हो गया कि लोग AI से पूछ कर अपनी बीमारियों का इलाज स्वयं कर रहे हैं। AI उनके लिए सामान्य बीमारियों का डॉक्टर हो गया है। 

रिसर्च रिपोर्ट का निष्कर्ष

SE Ranking के शोधकर्ताओं द्वारा इसी टॉपिक पर रिसर्च की गई। इसके बाद उन्होंने बताया कि, खास तौर पर Google Gemini AI Overviews विश्वसनीय चिकित्सा संस्थानों के बजाय YouTube Video से प्राप्त जानकारी के आधार पर लोगों को उत्तर दे रहे हैं। यह तो आप जानते है कि 2024 तक YouTube पर हर कोई डॉक्टर बना हुआ था। भारत में ऐसे हजारों YouTube कंटेंट क्रिएटर मिल जाएंगे, जिन्होंने साइंस सब्जेक्ट से हायर सेकेंडरी की परीक्षा भी नहीं दी लेकिन YouTube चैनल बनाकर लोगों को स्वास्थ्य, फिटनेस और गंभीर बीमारियों का इलाज बताते रहते हैं। 

AI का सबसे बड़ा  टंटा, लोकप्रियता vs सटीकता 

LLM की सबसे बड़ी प्रॉब्लम यही है। सटीक जानकारी के स्थान पर लोकप्रिय कंटेंट को प्राथमिकता दी जाती है। नाम AI जरूर है परंतु इसकी अपनी कोई बुद्धि नहीं है। कुछ फिक्स फार्मूले हैं। शोधकर्ताओं ने 50,000 से अधिक स्वास्थ्य संबंधी खोजों (queries) का विश्लेषण किया और पाया कि:
• गूगल के एआई जवाबों में यूट्यूब को 4.43% बार cite किया गया था।
• इसके विपरीत, अकादमिक पत्रिकाओं और सरकारी स्वास्थ्य पोर्टलों की हिस्सेदारी 1% से भी कम रही।
• अकेले जर्मनी में किए गए अध्ययन में पाया गया कि यूट्यूब को कुल 465,823 उद्धरणों में से 20,621 बार चुना गया, जो किसी भी अन्य चिकित्सा साइट से कहीं अधिक है। 

टिक-टिक करता टाइम बम

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह रुझान सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए एक "टिक-टिक करता टाइम बम" साबित हो सकता है। चूंकि यूट्यूब एक फ्री-फॉर-ऑल प्लेटफॉर्म है, इसलिए वहां एक अनुभवी न्यूरोसर्जन और एक साधारण लाइफ कोच को समान महत्व मिलता है, जिससे गलत सूचना फैलने का खतरा बढ़ जाता है।

गंभीर चिकित्सा गलतियाँ और जान का जोखिम 

द गार्जियन की एक जांच में यह बात सामने आई है कि गूगल का एआई ओवरव्यू कई मामलों में खतरनाक और गलत जानकारी दे रहा है,:
Pancreatic Cancer: एआई ने मरीजों को उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार यह सलाह मरीजों की मृत्यु का जोखिम बढ़ा सकती है।

Liver function tests: एआई ने इस टेस्ट के बारे में फर्जी जानकारी दी, जिससे गंभीर लिवर रोग से जूझ रहे मरीज खुद को स्वस्थ समझकर इलाज में देरी कर सकते हैं।

Cancer treatment: ऐसी आशंका जताई गई है कि कैंसर के बारे में पूछने पर एआई कीमोथेरेपी के बजाय "एल्कलाइन वाटर" जैसे अपुष्ट दावों वाले वीडियो का सुझाव दे सकता है। 

गूगल का पक्ष 
इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए गूगल के प्रवक्ता ने कहा कि एआई ओवरव्यू उच्च गुणवत्ता वाली सामग्री को सतह पर लाने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, चाहे उनका फॉर्मेट कुछ भी हो। गूगल का दावा है कि:
• यूट्यूब पर कई लाइसेंस प्राप्त चिकित्सा पेशेवर और अस्पताल मौजूद हैं।
• कंपनी के अनुसार, उनके डेटा में शीर्ष 25 यूट्यूब वीडियो में से 96% चिकित्सा चैनलों से थे।
• हालाँकि, शोधकर्ताओं ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि ये 25 वीडियो गूगल द्वारा उद्धृत कुल यूट्यूब लिंक्स का 1% से भी कम हिस्सा हैं, और बाकी वीडियो की विश्वसनीयता संदिग्ध हो सकती है।

निष्कर्ष: जब तक गूगल और विशेषज्ञ दोनों एक निष्कर्ष पर नहीं पहुंच जाते तब तक एक भारतीय नागरिक की पारंपरिक आदत के अनुसार अपन को इससे दूर रहना चाहिए। AI का उपयोग करना चाहिए परंतु अपनी हेल्थ के बारे में कोई एडवाइस नहीं लेनी चाहिए। अपनी बीमारी के बारे में कोई दवाई नहीं पूछनी चाहिए। भारतीय वैसे भी AI से ज्यादा मेडिकल स्टोर वाले पर डिपेंड रहे थे। जर्मनी में लोग जो सवाल AI से पूछ रहे हैं, भारत में वही सवाल मेडिकल स्टोर वाले से पूछते हैं। और यकीन मानिए, मेडिकल स्टोर वाला, AI से कहीं ज्यादा अच्छे जवाब देता है। इसलिए भारत में खतरा थोड़ा कम है।
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