BHOPAL की डॉ ऋचा पांडे केस में डॉ अभिजीत पांडे को सुप्रीम कोर्ट से राहत

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विधि संवाददाता, नई दिल्ली, 23 जनवरी 2026
: पिछले साल 2025 में, मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में हुई डॉक्टर रिचा पांडे की दहेज के लिए हत्या के आरोप में गिरफ्तार किए गए डॉक्टर अभिजीत पांडे को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत मंजूर कर ली है। अब मामला ट्रायल कोर्ट में चलेगा और यह डिसाइड किया जाएगा कि, डॉक्टर रिचा पांडे की हत्या हुई थी या फिर उन्होंने सुसाइड किया था। यह भी डिसाइड किया जाएगा कि क्या डॉक्टर रिचा की सुसाइड के लिए डॉक्टर अभिजीत पांडे जिम्मेदार हैं। 

मामले की पृष्ठभूमि और पक्ष

यह मामला अभिजीत पांडे (अपीलकर्ता) बनाम मध्य प्रदेश राज्य और एक अन्य (प्रतिवादी) के बीच है। अपीलकर्ता अभिजीत पांडे भोपाल के एम.पी. नगर में क्लिनिक चलाने वाले एक डेंटिस्ट हैं। उनकी शादी 04 दिसंबर 2024 को डॉ. ऋचा पांडे से हुई थी, जो पेशे से एक एनेस्थेटिस्ट थीं। शादी के कुछ ही महीनों बाद, 21 मार्च 2025 को डॉ. ऋचा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

Judges and Key Dates

• सुप्रीम कोर्ट पीठ: न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया।
• निर्णय की तिथि: 23 जनवरी, 2026
• गिरफ्तारी: 25 मार्च 2025
• आरोप पत्र (Charge-sheet): 05 जून 2025
• आरोप तय (Framing of Charges): 07 जुलाई 2025 को विशेष न्यायाधीश (O.A.W.)/पांचवें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, भोपाल द्वारा।
• हाई कोर्ट का आदेश: 06 अक्टूबर 2025 (जमानत याचिका खारिज की गई थी)।

Arguments in Court

अपीलकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्री विवेक के. तन्खा ने दलीलें पेश कीं:
• उन्होंने कहा कि यह आत्महत्या का मामला है क्योंकि मृतका को अपने पति (अपीलकर्ता) का उसकी क्लिनिक में काम करने वाली एक महिला, 'माही' के साथ विवाहेतर संबंध होने का संदेह था।
• तन्खा ने तर्क दिया कि शुरूआती प्राथमिकी (FIR) और बयानों में दहेज या पैसे की मांग का कोई जिक्र नहीं था; ये आरोप बाद में सुधार (improvement) के रूप में जोड़े गए हैं।
• अपीलकर्ता एक डेंटिस्ट है, कोई पेशेवर अपराधी नहीं, और वह जांच में सहयोग के लिए तैयार है।

इसके विपरीत, मध्य प्रदेश राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता श्री श्रीधर पोटा राजू और शिकायतकर्ता की ओर से श्री प्रवीण चतुर्वेदी ने जमानत का पुरजोर विरोध किया:
• उनका दावा था कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि हत्या है, जिसे 'एट्रैक्यूयिम बेसीलेट' (Atracurium Besylate) इंजेक्शन देकर अंजाम दिया गया।
• उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम में शरीर पर 5 चोटें पाई गईं, जो मृत्यु से पहले शारीरिक हमले का संकेत देती हैं।
• मृतका के माता, पिता, भाई और चाचा के बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अपीलकर्ता पैसे की मांग करता था, जिससे यह दहेज हत्या का मामला बनता है। 

Court's Observations and Verdict 

सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले का बारीकी से विश्लेषण किया और निम्नलिखित मुख्य टिप्पणियां कीं:
1. अदालत ने पाया कि मृतका खुद एक एनेस्थेटिस्ट थी और उसकी मौत एक ऐसी दवा से भरे हुए इंजेक्शन से हुई, जो एनेस्थीसिया के दौरान इस्तेमाल होने वाली दवा है।
2. न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा ने गौर किया कि शुरुआती FIR और केस डायरी के बयानों में दहेज की मांग का कोई उल्लेख नहीं था, यह आरोप बाद के बयानों में सामने आए।
3. पुलिस को मृतका के फोन से एक सुसाइड नोट की फोटो और ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली थी, जिसमें वह अपने पति से 'माही' को महत्व देने को लेकर झगड़ रही थी और कह रही थी कि "कल सुबह तुम मेरा मरा हुआ चेहरा देखोगे"।
4. पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, हाथ पर सुई के निशान स्वयं द्वारा भी लगाए जा सकते थे (self-inflicted)।

निष्कर्ष: अदालत ने कहा कि अपीलकर्ता 25 मार्च 2025 से जेल में है और उसके फरार होने की संभावना नहीं है। इन तथ्यों को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और अपीलकर्ता अभिजीत पांडे को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत के लिए हैं और मुख्य मुकदमे (trial) पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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