भोपाल, 5 दिसंबर 2025: यह एक ऐसी कहानी है जिसमें एक दोस्त ने दोस्ती में धोखा दिया और दूसरे दोस्त ने बचा लिया। एक इंजीनियर की शिकायत पर दूसरे इंजीनियर को गिरफ्तार किया गया। यह कहानी भ्रष्टाचार की सामाजिक स्वीकार्यता का भी प्रमाण है। जहां लोगों को लगता है कि, योग्यता के बावजूद कोई पद पाने के लिए रिश्वत देना जरूरी होता है।
Quality Council of India में Chairman पद का सौदा
भोपाल के मिसरोद इलाके में रहने वाले 40 साल के आशीष कुलश्रेष्ठ एक क्वालिटी कंट्रोल इंजीनियर हैं। उनका पुराना दोस्त है आमोद कुमार पाठक, जो खुद भी इंजीनियर है। एक दिन आमोद ने आशीष को सपने दिखाने शुरू कर दिए – बोला, "यार, Quality Council of India में Chairman का पद खाली पड़ा है। मैं तुझे वहाँ appoint करवा दूंगा, बस दिल्ली चलना पड़ेगा।"
अज्ञानता और लालच के कारण इंजीनियर ठगी का शिकार हुआ
आशीष को लगा दोस्त है, भरोसा कर लिया। दोनों दिल्ली पहुंचे। वहाँ आमोद ने आशीष की मुलाकात नवीन सिंह नाम के शख्स से कराई। नवीन को "Ministry का बड़ा अफसर" बताया गया। बातें हुईं, चाय-नाश्ता हुआ, और डील पक्की – Chairman बनवाने के बदले 15 लाख रुपये!
आशीष पूरी तरह convince हो गए। भोपाल लौटकर उन्होंने अपने ही दोस्त आमोद के अकाउंट में 15 लाख रुपये transfer कर दिए। अब आमोद बोला, "बस अब IB verification बाकी है, वो हो जाएगी तो appointment letter आ जाएगा।"
दोस्त ने फंसाया था दोस्त ने बचा लिया
फिर आया ट्विस्ट। बुधवार रात को एक फोन आया – "मैं अशफाक आलम, IB से बोल रहा हूँ। भोपाल आया हूँ, आपका verification करना है।" उस समय आशीष गोवा में थे, तो उन्होंने अपने दूसरे दोस्त शैलेंद्र मिश्रा को भेज दिया कि तुम जाकर मिल लो। शैलेंद्र मिले तो उनको कुछ गड़बड़ लगा। बातें सुनकर शक हुआ कि ये IB officer कम और ठग ज्यादा लग रहा है। शैलेंद्र ने तुरंत मिसरोद पुलिस को खबर कर दी। पुलिस आई और "अशफाक आलम" को पकड़ लिया।
अब असली माजरा खुला - ये अशफाक आलम कोई IB अफसर नहीं, बल्कि दिल्ली का एक लिफ्ट टेक्नीशियन राजेश कुमार था! मुख्य आरोपी नवीन सिंह ने ही इसे फर्जी IB अफसर बनाकर भोपाल भेजा था और बदले में 70 हजार रुपये दिए थे। मतलब पूरा प्लान था कि victim को पूरा यकीन हो जाए कि मामला genuine चल रहा है।
गुरुवार को आशीष गोवा से लौटे और मिसरोद थाने में जाकर पूरी FIR दर्ज कराई। अब पुलिस आमोद कुमार पाठक, नवीन सिंह और राजेश कुमार (फर्जी अशफाक) के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर चुकी है। 15 लाख की ठगी का मामला है, जांच चल रही है।
मोरल ऑफ़ द स्टोरी: दोस्त का चुनाव हमेशा सोच समझ कर करना चाहिए। कोई कितना भी पक्का दोस्तों यदि कोई ऑफर देता है तो पहले यह चेक जरूर कर लेना चाहिए कि, उसकी अपनी क्षमता कितनी है। जीवन में अपनी योग्यता से अधिक पानी की कोशिश नहीं करनी चाहिए। समझ में नहीं आए तो अच्छे दोस्त से पूछ लेना चाहिए वरना 15 लाख तो गए ही, ऊपर से IB का डर भी अलग से मिलता है।

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