BHARAT में अब सस्ती बैटरी से रात में भी चमकेगा सूरज, 24 घंटे सोलर बिजली

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न्यूज़ रूम, 11 दिसंबर 2025
: लंदन स्थित स्वतंत्र ऊर्जा थिंक-टैंक Ember की नई रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के बिजली सेक्टर में तहलका मचा दिया है। रिपोर्ट कहती है कि बैटरी स्टोरेज की कीमत इतनी तेज़ी से गिरी है कि अब सोलर बिजली को दिन में बनाकर रात में भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। मतलब साफ है – सोलर अब सिर्फ दिन की बिजली नहीं, बल्कि 24×7 विश्वसनीय और डिस्पैचेबल पावर बन चुका है।

बैटरी पैक की कीमत में लगातार गिरावट आ रही है

2025 में बैटरी स्टोरेज की औसत कीमत घटकर सिर्फ 65 डॉलर प्रति मेगावाट-घंटा रह गई है (चीन और अमेरिका को छोड़कर बाकी दुनिया के लिए)। पूरी बैटरी सिस्टम (इंस्टॉलेशन सहित) की लागत अब 125 डॉलर प्रति किलोवाट-घंटा के आसपास है, जिसमें से बैटरी पैक की कीमत सिर्फ 75 डॉलर/kWh रह गई है।

Ember की ग्लोबल इलेक्ट्रिसिटी एनालिस्ट कोस्तांसा रेंगेलोवा ने कहा, “2024 में बैटरी की कीमतें 40% तक गिरी थीं और 2025 में भी यही रफ्तार बरकरार है। बैटरियों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है। अब सोलर + स्टोरेज मिलकर कोयले और गैस से भी सस्ती बिजली दे सकता है।”

कितनी सस्ती हुई स्टोरेज, आंकड़े खुद बोलते हैं  

  • अगर दिन में बनी आधी सोलर बिजली को 4-6 घंटे के लिए स्टोर किया जाए तो स्टोरेज का अतिरिक्त खर्च सिर्फ 33 डॉलर/MWh आता है।  
  • वैश्विक औसत सोलर बिजली की कीमत अभी करीब 43 डॉलर/MWh है।  
  • यानी स्टोरेज के साथ कुल लागत = 76 डॉलर/MWh  
  • यह कई देशों में चल रहे कोल प्लांट्स और गैस प्लांट्स से भी कम है।

भारत के लिए क्यों है यह बड़ी खबर?  

भारत में पीक डिमांड तेज़ी से बढ़ रही है और शाम 5 से 10 बजे के बीच सबसे ज्यादा लोड आता है जब सोलर बिजली खत्म हो जाती थी। अब सस्ती बैटरी के कारण दिन की सोलर बिजली को शाम-रात के लिए स्टोर करना फायदे का सौदा बन गया है।
कोयला अभी भी भारत की 70% से ज्यादा बिजली देता है, लेकिन सोलर + बैटरी अब कोयले से सस्ता और साफ विकल्प बन रहा है।
सरकार के 500 GW नॉन-फॉसिल लक्ष्य और आने वाली बैटरी स्टोरेज नीतियों को यह रिपोर्ट जबरदस्त बूस्ट देगी।

दुनिया भर में क्या हो रहा है - ताज़ा अपडेट

  • चीन 2025 में ही 100 GW से ज्यादा बैटरी स्टोरेज इंस्टॉल करने की राह पर है।  
  • अमेरिका में IRA सब्सिडी की वजह से 2025-26 में बड़े स्तर पर ग्रिड-स्केल बैटरी प्रोजेक्ट आ रहे हैं।  
  • भारत में भी Adani, ReNew, Tata Power जैसे बड़े ग्रुप गीगावाट लेवल के सोलर + बैटरी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।  
  • हाल ही में राजस्थान और गुजरात में 1-2 GW के राउंड-द-क्लॉक रिन्यूएबल एनर्जी टेंडर निकले हैं, जिसमें सोलर + स्टोरेज अनिवार्य है।

अंत में: रिपोर्ट का संदेश

Ember की रिपोर्ट साफ संदेश देती है, सस्ती बैटरी ने सोलर पावर को “सिर्फ दिन वाली बिजली” से “कभी भी मिलने वाली सस्ती और भरोसेमंद बिजली” में बदल दिया है। भारत जैसे तेज़ी से बढ़ते देशों के लिए यह मौका है कि कोयले की जगह सोलर + बैटरी को अपनी बिजली व्यवस्था की रीढ़ बना लें।

क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन का वह मोड़ जो सालों से इंतज़ार था, शायद अब सचमुच आ गया है।
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