भोपाल, 23 दिसंबर 2025: मध्यप्रदेश के अतिथि शिक्षक लंबे समय से अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं। सरकार की ओर से की गई घोषणाएं पूरी न होने से उनकी नाराजगी बढ़ती जा रही है और अब वे प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। भोपाल में आयोजित प्रदेश स्तरीय बैठक में अतिथि शिक्षक समन्वय समिति ने फैसला लिया कि 25 दिसंबर 2025 से 25 जनवरी 2026 तक सभी संभागों में सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके बाद 31 जनवरी को राजधानी भोपाल में सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन होगा। संगठन का साफ आरोप है कि भाजपा सरकार ने विधानसभा और सार्वजनिक मंचों से किए वादों को पूरा नहीं किया, जिससे शिक्षकों का भविष्य अंधकार में डूबा हुआ लग रहा है।
सबसे ज्यादा गुस्सा स्कूल शिक्षा मंत्री के बयान पर
समिति के संस्थापक पी.डी. खैरवार के निर्देशन में हुई इस बैठक में अध्यक्ष सुनील परिहार समेत सभी पदाधिकारियों ने आंदोलन की रणनीति तैयार की। प्लान ये है कि पहले संभागीय स्तर पर सम्मेलन करके अतिथि शिक्षकों को एकजुट किया जाए, ताकि आंदोलन को ज्यादा ताकत मिल सके और सरकार पर दबाव बने। बैठक में सबसे ज्यादा गुस्सा स्कूल शिक्षा मंत्री के हालिया बयान पर दिखा। वक्ताओं ने कहा कि मंत्री ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उन घोषणाओं को पूरा करने में असमर्थता जता दी, जिनमें अतिथि शिक्षकों को विभागीय परीक्षा से नियमित करना और सीधी भर्ती में बोनस अंक देना शामिल था। शिक्षकों का सवाल है कि तब भी भाजपा की सरकार थी और अब भी है, तो वादे पूरे क्यों नहीं हो रहे? ये सब सुनकर मन दुखी हो जाता है, क्योंकि सालों से मेहनत करने वाले ये शिक्षक सिर्फ स्थायित्व चाहते हैं।
मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षक 17 साल से अंशकालीन कर्मचारी
प्रदेश महासचिव चंद्रशेखर राय ने साफ कहा कि अगर सरकार वादे निभाने में असमर्थ है तो मीडिया के सामने मान ले कि घोषणाएं झूठी थीं। आधे-अधूरे आश्वासनों से शिक्षकों का भविष्य और ज्यादा अंधेरे में धकेला जा रहा है। वहीं प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने कैबिनेट के उस फैसले पर नाराजगी जताई जिसमें केवल तीन कैडर रखने और बाकी व्यवस्थाएं खत्म करने की बात है। अभी अतिथि शिक्षक अंशकालीन तरीके से काम कर रहे हैं, जबकि कई तो 15-17 साल से सेवा दे रहे हैं। इतना अनुभव होने के बावजूद अस्थायी रखना सरासर अन्याय लगता है।
अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक का दर्जा दिया जाए
संगठन की मुख्य मांग है कि अतिथि शिक्षकों को संविदा शिक्षक का दर्जा दिया जाए। नेताओं का कहना है कि वर्षों का अनुभव रखने वाले इन शिक्षकों को ऐसे रखना शिक्षा व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा रहा है। पदाधिकारी बी.एम. खान ने याद दिलाया कि विधायक रहते खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अनुभवी अतिथि शिक्षकों को संविदा बनाने की अनुशंसा की थी। अब मुख्यमंत्री बनने के बाद उनसे उम्मीद है कि वे शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित करेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि अगर मांगों पर जल्द फैसला नहीं हुआ तो 31 जनवरी का प्रदर्शन और बड़ा और तेज होगा।
ये मुद्दा काफी पुराना है और अतिथि शिक्षकों की लड़ाई सालों से चल रही है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2023 में महापंचायत में कई घोषणाएं की थीं, जैसे मानदेय बढ़ाना, भर्ती में 50 प्रतिशत आरक्षण और बोनस अंक, लेकिन कई वादे अभी तक अधर में लटके हैं। 2024-2025 में भी कई बार प्रदर्शन हुए, जैसे सितंबर में भोपाल में धरना, ई-अटेंडेंस के खिलाफ हड़ताल और नियमितीकरण की मांग को लेकर रैलियां। हाल ही में जनवरी 2025 में भी भोपाल में आंदोलन हुआ था जहां शिक्षक भर्ती में आरक्षण और बोनस की मांग उठी। सरकार की ओर से कभी 25 प्रतिशत आरक्षण की बात हुई, तो कभी अन्य व्यवस्थाएं, लेकिन पूरा समाधान नहीं निकला। उम्मीद है कि इस बार का आंदोलन शिक्षकों की आवाज को मजबूती से सरकार तक पहुंचाए और कोई ठोस फैसला हो। - रिपोर्ट शैलेंद्र पटेल।
.webp)