MP SCHOOL SHIKSHA: भ्रष्ट संविदा शिक्षक भ्रष्टाचार करके परमानेंट हो गया, दूसरी बार बर्खास्त

Updesh Awasthee
भोपाल, 9 नवंबर 2025
: क्या किसी बर्खास्त कर्मचारियों को दोबारा से बर्खास्त किया जा सकता है, लेकिन यदि मामला स्कूल शिक्षा विभाग का हो तो कुछ भी हो सकता है। एक संविदा शिक्षक को भ्रष्टाचार के आरोप में बर्खास्त किया गया, फिर भी वह परमानेंट होकर माध्यमिक शिक्षक बन गया। डिपार्टमेंट को कोई प्रॉब्लम नहीं थी लेकिन जब विभीषण ने बताया तब कलेक्टर ने दूसरी बार उसको बर्खास्त किया। 

श्योपुर में भ्रष्टाचार के आरोप में हुई थी बर्खास्तगी

इस कहानी की एकमात्र किरदार श्री बलवीर सिंह तोमर को वर्ष 2009 में श्योपुर जिले में संविदा शाला शिक्षक वर्ग-2 के पद पर नियुक्त किया गया था। उन्हें 13 अगस्त 2009 को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ठर्राकलां में पदस्थ किया गया था। हालांकि, कार्यकाल के दौरान उन पर अवैध वसूली के आरोप सिद्ध हुए, जिसके बाद 27 दिसंबर 2010 को उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई थीं।

श्योपुर में बर्खास्त हुआ तो शिवपुरी में ज्वाइन कर लिया

सेवाएं समाप्त होने के कुछ ही समय बाद, 18 जनवरी 2011 को बलवीर सिंह तोमर ने शिवपुरी जिले के पोहरी विकासखंड में संविदा शिक्षक वर्ग-2 के रूप में दोबारा पदस्थापना प्राप्त कर ली। जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है कि, इस नियुक्ति के दौरान उन्होंने यह तथ्य छिपाया कि उन्हें पूर्व में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण नौकरी से बर्खास्त किया जा चुका था। 

कितनी अजीब बात है, स्कूल शिक्षा विभाग, भ्रष्टाचार में बर्खास्त कर्मचारी से उम्मीद करता है कि वह सच बोलेगा। इलेक्ट्रॉनिक अटेंडेंस के लिए युद्ध लड़ने वाला डिपार्मेंट इतना सा भी सिस्टम नहीं बन पाया कि, किसी डिफाल्टर कर्मचारियों को किसी दूसरे जिले या स्कूल में ज्वाइन करने से रोका जा सके।

प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी को सब पता था? 

स्कूल शिक्षा विभाग के सूत्रों का कहना है कि शिवपुरी के प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी श्री विवेक श्रीवास्तव को श्री बलबीर सिंह तोमर के बारे में सब कुछ पता था, लेकिन उन्होंने कार्रवाई नहीं की क्योंकि सूचना प्राप्त हुई थी कोई लिखित शिकायत नहीं मिली थी, और इस प्रकार की सूचना पर कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है।

कलेक्टर ने दूसरी बार बर्खास्त किया

जांच में मामला सत्य पाए जाने के बाद, कलेक्टर ने उनकी वर्तमान नियुक्ति को अवैधानिक करार दिया। इसी आधार पर उन्हें नौकरी से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।
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