भोपाल, 14 नवंबर 2025: राज्य शासकीय कर्मचारी अधिकार संरक्षण संघ (आरएसकेएएसएस) ने मध्य प्रदेश सरकार पर पेंशनरों के साथ आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य पुनर्गठन अधिनियम की धारा 49(6) को अव्यवहारिक बताते हुए इसे तत्काल समाप्त करने की मांग की है। संघ का कहना है कि छत्तीसगढ़ से सहमति लेने के नाम पर महंगाई राहत और भत्ता (डीए) में हो रही देरी से पेंशनरों को कई महीनों का एरियर गुम हो रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड जैसे अन्य पुनर्गठित राज्यों में ऐसी कोई बाध्यता नहीं है।
संघ के नेताओं ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार द्वारा घोषित तिथि से ही डीए बढ़ोतरी लागू होनी चाहिए, लेकिन मध्य प्रदेश में छत्तीसगढ़ राज्य पुनर्गठन अधिनियम की इस धारा के आड़ में सहमति लेने का प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जो पूरी तरह अव्यवहारिक है। इससे पेंशनरों को न केवल आर्थिक नुकसान हो रहा है, बल्कि वृद्धावस्था में शारीरिक बीमारियों और दैनिक जीवनयापन के खर्चों के लिए भी वे भारी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। संघ प्रमुख शील प्रताप सिंह पुंढीर ने कहा, "यह देरी पेंशनरों के साथ अन्याय है। अन्य राज्यों में परस्पर सहमति की कोई जरूरत नहीं पड़ती, फिर मध्य प्रदेश क्यों पिछड़ रहा है?"
संघ के उपाध्यक्ष भगवान सिंह ठाकुर, महासचिव व्यासमुनि चौबे, डीएस सनोदिया, कृष्णकांत मिश्रा, लाला राम रैकवार और प्रणव खरे समेत अन्य कर्मचारी नेताओं ने राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन को पत्र लिखकर मांग की है कि धारा 49(6) की इस गैरप्रासंगिक बाध्यता को हटा दिया जाए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को स्वतंत्र रूप से केंद्र की घोषित तिथि से ही सेवकों और पेंशनरों को महंगाई लाभ प्रदान करने के आदेश जारी करने चाहिए, ताकि आर्थिक क्षति से बचा जा सके। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की राह अपनानी पड़ेगी।
यह मुद्दा राज्य के लाखों पेंशनरों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि डीए में देरी से उनकी मासिक पेंशन प्रभावित हो रही है। सरकार की ओर से अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
रिपोर्ट: शोएब सिद्दीकी , प्रदेश प्रवक्ता।

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