भारतीय न्याय संहिता कहती है कि, पति-पत्नी के बीच का संबंध, उनका नितांत निजी विषय होता है और कानून इसमें दखल नहीं देता, लेकिन इसी कानून में एक प्रावधान ऐसा भी है, यदि पत्नी के साथ उसकी मर्जी के बिना फिजिकल रिलेशन बनाए तो 7 साल जेल की सजा होगी और जुर्माना भी देना पड़ेगा।
Bharatiya Nyaya Sanhita - BNS की धारा 67
1. अपराध का मूल तत्व (Core Offence): जो कोई भी व्यक्ति अपनी ही पत्नी के साथ यौन संबंध बनाता है। यह कृत्य तब अपराध माना जाता है जब पत्नी अलग रह रही हो, भले ही वह अलगाव किसी न्यायिक पृथक्करण डिक्री (decree of separation) के तहत हो या किसी अन्य प्रकार से। यह यौन संबंध पत्नी की सहमति के बिना किया गया हो। इसका मतलब हुआ कि यदि पत्नी रूठ कर मायके आ गई, या फिर अपना बेडरूम और पति का घर छोड़कर कहीं और चली गई है, तब ऐसी स्थिति में भी पति द्वारा पत्नी की मर्जी के बिना, बनाया गया रिलेशन, अपराध की श्रेणी में आएगा।
2. सज़ा (Punishment): इस अपराध के लिए अपराधी को किसी भी प्रकार के कारावास (imprisonment of either description) से दंडित किया जाएगा। कारावास की अवधि दो वर्ष से कम नहीं होगी, लेकिन यह सात वर्ष तक बढ़ाई जा सकती है। अपराधी जुर्माने के लिए भी उत्तरदायी होगा।
3. स्पष्टीकरण (Explanation of Terms): इस धारा के प्रयोजनों के लिए, "यौन संबंध" (sexual intercourse) का अर्थ वही होगा जो भारतीय न्याय संहिता की धारा 63 के खंड (a) से (d) में उल्लिखित कृत्यों का है। (धारा 63 बलात्कार को परिभाषित करती है)।
4. संबंधित कानूनी संदर्भ (Related Legal Context): यह धारा BNS के अध्याय V ('महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों') के अंतर्गत आती है, जो विशेष रूप से यौन अपराधों से संबंधित है।
यदि कोई लोक सेवक (public servant) संज्ञेय अपराध (cognizable offence) से संबंधित कोई जानकारी दर्ज करने में विफल रहता है, और उस अपराधों की सूची में धारा 67 भी शामिल है, तो उसे कठोर कारावास की सज़ा दी जा सकती है।
धारा 67 के तहत कथित या सिद्ध अपराध की पीड़िता की पहचान का खुलासा करने पर भी दंड का प्रावधान है (धारा 72(1) के तहत)। ✍️लेखक: उपदेश अवस्थी, पत्रकार एवं विधि सलाहकार। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article.

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