MP OBC आरक्षण: सुप्रीम कोर्ट ने मामले हाई कोर्ट को वापस भेजे या नहीं, VIDEO देखिए आज क्या हुआ

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मध्य प्रदेश में 27% ओबीसी आरक्षण के लिए आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। एक दिन पहले बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी वकील द्वारा समय मांगे जाने पर कहा था कि यदि आप तैयारी करके नहीं आ रहे हैं तो इस मामले को हम वापस हाई कोर्ट में भेज देते हैं। आईए जानते हैं कि आज सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ, क्या सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों को वापस हाई कोर्ट में भेज दिया है? 

कल सुप्रीम कोर्ट ने समय देने से मना कर दिया था

सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी पक्ष के अधिवक्ता श्री रामेश्वर सिंह ठाकुर ने बताया कि, मैं प्रारंभ से ही ओबीसी के पक्ष में पैरवी कर रहा हूं। आज मामले माननीय सुप्रीम कोर्ट में लिस्टेड हुए थे, टॉप ऑफ द बोर्ड थे। कल माननीय सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि, सभी एंट्रम ऑर्डर बैकेट करते हुए मामले पुनः हाईकोर्ट को रिमांड करेंगे। तो इस बात को लेकर के मध्य प्रदेश शासन की ओर से माननीय श्री तुषार मेहता जी ने इस मैटर में समय की मांग की गई थी, लेकिन कोर्ट ने मामलों की गंभीरता को दृष्टिगत रखते हुए आज के लिए सूचीबद्ध किए थे और आज यह पूरी संभावना थी कि मामले हाई कोर्ट में बैक होंगे। 

सुप्रीम कोर्ट ने मामले को फाइनल लिस्ट में प्लेस करने का आदेश दिया

लेकिन माननीय तुषार मेहता जी ने सुबह मेंशन करके और मामलों में फाइनल हियरिंग किए जाने का निवेदन किया, तो माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी बात को दृष्टिगत रखते हुए और जो नेक्स्ट डेट उन्होंने फिक्स की है लीव ग्रांट करके सेकंड वीक ऑफ नवंबर में इन सारे मामलों की फाइनल सुनवाई की जाएगी और फाइनल लिस्ट में प्लेस करने का माननीय सुप्रीम कोर्ट ने आदेश भी किया गया है।

सरकार ने पॉलिटिकल रीजन से तारीख बढ़वाई है: वरुण ठाकुर

13% HOLD अभ्यर्थियों के अधिवक्ता श्री वरुण ठाकुर ने कहा कि, यह बड़ा दुर्भाग्यपूर्ण है सुप्रीम कोर्ट बार-बार प्रायोरिटी पर मैटर रखता है और यह कहता है कि हम इसको प्रायोरिटी पर रखेंगे। टॉप ऑफ द बोर्ड रखता है। हर बार सरकार अपने ही कानून को लागू ना करने के कुछ ना कुछ बहाने ढूंढ रही है। सुप्रीम कोर्ट ने कई बार ऑब्जर्व किया उसके बावजूद भी यह इसको लागू नहीं कर रहा है।

आज भी सुप्रीम कोर्ट ने इसे प्रायोरिटी पर टॉप ऑफ द बोर्ड रखा था। सारी तैयारियां थी। आज फिर सरकार के द्वारा टाइम लिया गया। यह दुर्भाग्यजनक है और यह ऐसा लगता है ना कहीं ना कहीं सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की यह तारीख, पॉलिटिकल रीजन के कारण बढ़वाई गई। जिस तरीके से माहौल बना था, ओबीसी पक्ष को जिस तरीके से बेनिफिट मिलने वाला था, वह ना मिले इस को ध्यान में रखते हुए सरकार के द्वारा यह तारीख ली गई है, ताकि इलेक्शन के बाद इसकी सुनवाई हो सके। 

सेकंड वीक नवंबर में लगा हुआ है और ओबीसी को इंप्लीमेंटेशन होने वाला था जो एक्ट, वह फिर एक डिफर हो गया। इसमें करीब 1 लाख से ज्यादा बच्चे इंतजार कर रहे हैं जो सिलेक्टेड कैंडिडेट हैं। सिर्फ अपने अपॉइंटमेंट के लेटर का इंतजार कर रहे हैं ताकि उनको काम मिल सके। 
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