भोपाल, 10 नवंबर 2025: राजधानी स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) ने मध्य भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। एम्स भोपाल के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग में अब 'थोरासिक ऑन्कोलॉजी यूनिट' (Thoracic Oncology Unit) ने विधिवत कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। इस नई इकाई के शुरू होने से फेफड़ों और भोजन की नली के कैंसर से जूझ रहे मरीजों को अब दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।
जटिल सर्जरी अब भोपाल में ही संभव
एम्स प्रशासन के अनुसार, यह विशेष यूनिट फेफड़ों (Lung Cancer) और इसोफेगस (Esophagus) के कैंसर से संबंधित जटिल ऑपरेशनों के लिए समर्पित है। अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों और विशेषज्ञ सर्जनों की टीम द्वारा यहाँ विश्वस्तरीय उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य इन गंभीर बीमारियों के लिए वेटिंग टाइम को कम करना और मरीजों को कम लागत में उच्च गुणवत्ता वाली सर्जरी प्रदान करना है।
कैशलेस इलाज के लिए 'स्मार्ट कार्ड' और डिजिटल क्रांति
अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए स्मार्ट कार्ड सिस्टम को प्रभावी रूप से लागू किया गया है।
कतारों से मुक्ति: अब मरीजों को हर जांच या दवा के लिए बार-बार कैश काउंटर पर लाइन में नहीं लगना होगा।
आभा आईडी (ABHA) लिंकेज: डिजिटल इंडिया मुहिम के तहत मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड को 'आभा' आईडी से जोड़ा गया है, जिससे उनकी रिपोर्ट और उपचार का इतिहास पूरी तरह पेपरलेस और सुरक्षित हो गया है।
ड्रोन तकनीक का सफल परीक्षण
तकनीक के क्षेत्र में एक कदम और आगे बढ़ते हुए, एम्स भोपाल ने आपातकालीन स्थिति में दवाइयां और ब्लड सैंपल पहुंचाने के लिए ड्रोन डिलीवरी का भी सफल परीक्षण किया है। यह सुविधा आने वाले समय में भोपाल के आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए जीवनदायिनी साबित होगी।
बेहतर ओपीडी प्रबंधन
मरीजों के बढ़ते दबाव को देखते हुए एम्स ने ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन और कियोस्क मशीनों की संख्या में भी बढ़ोतरी की है। प्रशासन का दावा है कि इन नवाचारों से मरीजों का 'वेटिंग टाइम' काफी कम हुआ है और ओपीडी प्रक्रिया पहले से अधिक सुव्यवस्थित हो गई है।

