MP BHOJ BHOPAL में बीएड विद्यार्थियों का हंगामा, यूनिवर्सिटी ने धोखा दिया

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित Madhya Pradesh Bhoj (open) University में आज जमकर हंगामा हुआ। यहां बीएड स्पेशल की परीक्षाएं चल रही है। देशभर से विद्यार्थी परीक्षा देने के लिए आए हैं लेकिन लगभग 60 विद्यार्थियों को परीक्षा देने से रोक दिया गया है। कहा गया है कि उनके अटेंडेंस 70% से कम है। जबकि विद्यार्थियों का कहना है कि उन्हें यूनिवर्सिटी की ओर से ऐसी कोई चेतावनी नहीं दी गई थी। 

यूनिवर्सिटी ने चेतावनी नहीं दी, नियम के जाल में फंसाया गया है: प्रदर्शनकारी

विद्यार्थियों का आरोप है कि उन्हें अटेंडेंस की पहले से जानकारी नहीं दी गई बाद में परीक्षा के समय बताया गया। ऐसे में उन्हें परीक्षा देने की छूट देनी चाहिए। विद्यार्थियों का कहना है कि यूनिवर्सिटी का लक्ष्य यदि 75% अटेंडेंस था तो, इसकी सूचना लगातार दी जानी चाहिए थी। पढ़ाई के समय यह बताया जाना चाहिए था कि आपकी अटेंडेंस शॉर्ट होने वाली है। ऐसा कुछ भी नहीं बताया गया। हमको नियम के जाल में फंसा लिया गया है। 

मेरी तो केवल चार दिन की अटेंडेंस काम है: राकेश सेन

राजस्थान से आए राकेश सेन ने बताया कि मेरी केवल चार दिन अटेंडेंस कम है, इस वजह से हमें परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया। उन्होंने बताया कि राजस्थान में अभी पात्रता एग्जाम हुआ उसमें मैने पास कर लिया है, लेकिन यहां एग्जाम नहीं बैठने दिया जा रहा है। इस वजह से अगर हमारा बीएड कंप्लीट नहीं होगा तो हमारे नौकरी पर खतरा बन सकता है। 

यहां आने के बाद पता चला कि अटेंडेंस शॉर्ट हो गई: दिव्यांग सोनी कुमारी 

उड़ीसा से आई दिव्यांग सोनी कुमारी विश्वकर्मा ने बताया कि मै यहां 2 दिन पहले आई हूं। यहां आने के बाद पता चला कि मेरी अटेंडेंस शॉर्ट है और इस वजह से मुझे परीक्षा में नहीं बैठने दिया जा रहा है। सोनी बीएड सेकंड ईयर की छात्रा है। वे अपने मां के साथ भोपाल आई हैं और वह यहां रूम लेकर परीक्षा देने की तैयारी कर रही थी। लेकिन अटेंडेंस कम होने की वजह से उन्हें परीक्षा से वंचित होना पड़ रहा है।

नियम के अनुसार 75% अटेंडेंस जरूरी: कुल सचिव

भोज मुक्त विश्वविद्यालय के कुल सचिव ने बताया कि बीएड स्पेशल एजुकेशन की एग्जाम चल रहा है। जो नियम उन्हें हम फॉलो कर रहे हैं। जिन छात्रों की अटेंडेंस नहीं है उन्हें परीक्षा से रोका गया है। बाकी छात्र परीक्षा दे रहे हैं। नियम के अनुसार 75% अटेंडेंस जरूरी है लेकिन 5% तक छूट दी जा सकती है, इसलिए 70% जिन छात्रों के अटेंडेंस है उन्हें परीक्षा से नहीं रोका गया है। 

दरअसल यह नियम के दुरुपयोग का मामला है। कक्षा के दौरान विद्यार्थियों को शॉर्ट अटेंडेंस के बारे में लगातार सूचित किया जाना चाहिए। जिन विद्यार्थियों के अटेंडेंस शॉर्ट हो गई है उनका स्पष्ट रूप से बता दिया जाना चाहिए। यदि विद्यार्थी को पहले से पता होता तो वह यूनिवर्सिटी में आकर हंगामा नहीं करते। ऐसा लगता है जैसे यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने नियम की आड़ लेकर विद्यार्थियों को जाल में फंसा लिया है। शायद उनको उम्मीद थी के बाहर से आने वाले विद्यार्थी, उनकी बात मान लेंगे लेकिन हंगामा हो गया।

इस मामले में आपके क्या विचार हैं। क्या इस यूनिवर्सिटी के संदर्भ में आपके पास कोई एक्सपीरियंस है। कृपया इस समाचार के साथ आपकी प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर शेयर कीजिए ताकि सरकार पर दबाव बने और यह नियम बनाया जा सके कि नियम का पालन किस प्रकार से करवाना है।
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