जबलपुर स्थित हाई कोर्ट आफ मध्य प्रदेश द्वारा फूड कॉरपोरेशन आफ इंडिया के दो कर्मचारियों की याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार जैसे मामले में किसी भी डिपार्टमेंट इंक्वारी को इसलिए नहीं रोका जा सकता क्योंकि इस भ्रष्टाचार के मामले में कोर्ट में कैसे चल रहा है। भोपाल के रहने वाले दोनों कर्मचारियों का कहना था कि विभागीय जांच के कारण कोर्ट केस में उन्हें अपना बचाव करने में मुश्किल होगी।
FCI कर्मचारी अभिषेक पारे और गौरी शंकर मीणा के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश
FCI के ये दोनों कर्मचारी (अभिषेक पारे और गौरी शंकर मीणा) भोपाल और गोरखपुर शाखा में सहायक ग्रेड (टेक्निकल) के पद पर कार्यरत थे।शिकायतकर्ता ओमप्रकाश चंद्रवंशी की शिकायत पर, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अप्रैल 2023 में रिश्वत लेते हुए इन दोनों कर्मचारियों को रंगे हाथ पकड़ा था। रिश्वतखोरी के इस मामले में, CBI ने FIR दर्ज की थी और जून 2023 में चालान भी पेश किया।
इसके बाद, FCI ने भी इन कर्मचारियों के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए और विभागीय कार्रवाई शुरू की। FCI के कर्मचारियों ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि उनकी विभागीय जांच पर रोक लगाई जाए, उनका तर्क था कि आपराधिक मुकदमे और विभागीय जांच दोनों साथ-साथ चलने से उनकी क्रॉस-एग्जामिनेशन से आपराधिक मुकदमे की रणनीति उजागर हो जाएगी। हालांकि, जस्टिस विवेक जैन की पीठ ने उनकी याचिका को खारिज करते हुए कहा कि भ्रष्टाचार जैसे गंभीर आरोपों में विभागीय जांच को अनिश्चितकाल तक रोका नहीं जा सकता।
सुनवाई के दौरान, इन याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता संजय अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल और उत्कर्ष अग्रवाल ने पक्ष रखा। अदालत ने विभागीय जांच को रोकने से इनकार कर दिया और याचिका खारिज कर दी।