Ganesh ji के स्पेशल फैक्ट्स पार्ट 1: हल्दी के गणेश का क्या महत्व है और सुपारी की स्थापना कब करते हैं

Updesh Awasthee
भारतवर्ष का सबसे बड़ा त्यौहार श्री गणेश महोत्सव प्रारंभ हो गया है। यह 10 दिन तक चलता है, एवं हर आने वाले दिन त्यौहार का उत्साह और उल्लास बढ़ता चला जाता है। जीवन एवं वातावरण में श्रद्धा और भक्ति का संचार उनको भी महसूस होता है, जो किसी कारण से इस उत्सव में शामिल नहीं हो पाए। इसलिए हम आपको इन 10 दिनों में अपने प्रिय श्री गणेश के बारे में कुछ स्पेशल फैक्ट्स बताएंगे। यह सीरियल लगातार 10 दिनों तक चलेगा। आज इसका पहला एपिसोड है। 

सृजनात्मकता का प्रतीक श्री गणेश

गणेश जी ही स्वयं सृजन का प्रमाण है क्योंकि उनका जन्म ही नहीं हुआ, माता पार्वती ने एक पुतला बनाकर उसमें प्राण डाल दिए और गणेश जी का सृजन हो गया। इसीलिए हर सृजनात्मक एवं रचनात्मक शुभ अवसर पर गणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है। चाहे घर बनाना हो, चाहे दुकान खोलना हो, चाहे कोई बिजनेस शुरू करना हो, चाहे पढ़ाई शुरू करनी हो ...! यानी हर शुभ अवसर पर गणेश जी को ही प्रथम पूज्य माना गया है।  

सहजता और सरलता का प्रतीक श्री गणेश 

गणेश जी की मूर्ति बनाने के लिए सिर्फ मिट्टी की जरूरत होती है। गीली मिट्टी को गणेश जी का रूप देकर की गई पूजा आराधना का पूर्ण फल मिलता है। मिट्टी ना मिल पाए तो हल्दी की गांठ से भी गणेश जी का पूजन किया जा सकता है, नारद पुराण में तो हल्दी के गणेश को "स्वर्ण गणेश' के समान प्रभावशाली माना गया है और यदि गणेश जी की प्रतिमा ना मिल पाए तो पूजा की सुपारी से भी गणपति की स्थापना की जा सकती है। आपको बस "श्री गणेशाय नमः" बोलते हुए सिर्फ रोली के छींटे, चावल के दो दाने, गुड और बताशे से ही इनकी पूजा हो जाती है और अगर इनकी सरल पूजा में भी कोई गलती हो जाए तो कोई भय नहीं होता। 

यही बात बच्चों को समझने के लिए हमने एक कहानी भी बनाई है, आनंद लीजिए और सबके साथ शेयर कीजिए:-

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