मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्षों की नियुक्ति सिर्फ 6 महीने के लिए हुई है। 6 महीने बाद उनकी परफॉर्मेंस रिपोर्ट देखी जाएगी और पुअर परफॉर्मेंस वालों को बदल दिया जाएगा। यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि मध्य प्रदेश में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद हुआ। विरोध करने वालों की आवाज कांग्रेस पार्टी के सभी फिल्टर्स को पार करते हुए राहुल गांधी के कानों तक पहुंची गई और राहुल गांधी द्वारा अल्टीमेटम जारी कर दिया गया।
पृष्ठभूमि: मध्य प्रदेश में कांग्रेस के जिला अध्यक्षों का चयन कैसे हुआ था
संगठन सृजन अभियान के नाम पर राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया था। जिला अध्यक्षों के चयन के लिए दिल्ली से पर्यवेक्षकों को भेजा गया था। उन्होंने राहुल गांधी की गाइडलाइन के अनुसार जिला अध्यक्षों का चयन किया और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की ओर से लिस्ट जारी की गई। इस दौरान दावा किया गया था कि कांग्रेस पार्टी में पहली बार योग्यता को महत्व दिया गया है। जिले के सबसे पावरफुल और सबसे अधिक पोटेंशियल वाले नेता को कांग्रेस पार्टी का जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। परंतु लिस्ट के आउट होते ही, मध्यप्रदेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन देखे गए। कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। उन्होंने जो सवाल किया उसका जवाब मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी में किसी के पास नहीं था।
राहुल गांधी ने माना: मध्य प्रदेश में कांग्रेस जिला अध्यक्षों का चयन घोटाला हुआ है
राहुल गांधी ने दिल्ली में पार्टी के पर्यवेक्षकों की मीटिंग के दौरान खुलकर कहा कि मध्य प्रदेश में गड़बड़ी हुई है। मध्य प्रदेश से सबसे ज्यादा शिकायतें आई हैं। झारखंड, ओडिशा, पंजाब और उत्तराखंड के जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्षों के चयन में इस प्रकार की कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। राहुल गांधी के इस बयान से स्पष्ट हो गया कि उन्होंने, स्वीकार किया है कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्षों के चयन में गड़बड़ी हुई है।
मध्य प्रदेश में 6 महीने बाद कांग्रेस के कई जिला अध्यक्ष बदल जाएंगे
इस बयान के बाद कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपने लेटेस्ट स्टेटमेंट में कहा कि, कांग्रेस में 6 महीने का प्रोविजन पीरियड का एक सिस्टम है। जिला अध्यक्ष कैसा काम कर रहे हैं, पार्टी के क्या टारगेट हैं, उस पर हम काम कर पा रहे हैं या नहीं...इसको लेकर हर 6 महीने में रिव्यू होगा। उसी के आधार पर आगे बढ़ा जाएगा। पार्टी ने जो बोला नहीं, वह मैं बोल देता हूं कि 6 महीने में हर पद पर बैठे हुए व्यक्ति के काम का आकलन होगा कि वह उसे बताया गया कितना काम कर रहा है। अगर नहीं कर रहा है तो स्वाभाविक है कि पार्टी में काम करने वालों की जरूरत है।
जीतू पटवारी के इस बयान से स्पष्ट हो गया है कि, जितने जिला अध्यक्षों का विरोध जारी रहेगा उनको पद से हटाना पड़ेगा। राहुल गांधी का दबाव, जीतू पटवारी के बयान में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया।
मध्यप्रदेश में कांग्रेस के इन जिला अध्यक्षों का विरोध
भोपाल: भोपाल शहर के अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना को रिपीट किए जाने का पूर्व शहर अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना मोनू विरोध कर चुके हैं। मोनू का आरोप है कि जिला अध्यक्ष बनाने के एवज में डेढ़ करोड़ की डिफेंडर कार गिफ्ट की गई है। मोनू ने कार्यकर्ताओं के साथ राहुल गांधी को इस नियुक्ति के विरोध में खून से खत लिखा था।
इंदौर ग्रामीण: आगर के पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े को इंदौर ग्रामीण का अध्यक्ष बनाए जाने के विरोध में इंदौर, देपालपुर से लेकर दिल्ली तक विरोध प्रदर्शन हो चुका है। रविवार को दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय में जब जिला अध्यक्षों की कार्यशाला चल रही थी उस वक्त विपिन वानखेडे़ के विरोध में करीब 50 कांग्रेसी कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे।
डिंडोरी:ओंकार सिंह मरकाम को जिला अध्यक्ष बनाए जाने पर विरोध हुआ था। स्थानीय कांग्रेस नेता अजय साहू ने पुतला दहन की घोषणा की थी। जबकि राजेश मरावी ने इसे आदिवासी वर्ग के भविष्य के मुख्यमंत्री की भूमिका को छोटा दिखाने की कोशिश बताया था।
सतना शहर और ग्रामीण: सतना शहर के अध्यक्ष और ग्रामीण अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाह को लेकर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है। सिद्धार्थ वर्तमान में विधायक हैं। मेयर, लोकसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। ओबीसी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं। ऐसे में कार्यकर्ता एक व्यक्ति एक पद के नियम पर सवाल उठा रहे हैं।
बुरहानपुर: जिला प्रवक्ता एवं राजीव गांधी पंचायती सेल के अध्यक्ष हेमंत पाटिल ने विरोध स्वरूप पार्टी से इस्तीफा दे दिया।
देवास (ग्रामीण): जीतू पटवारी के करीबी गौतम बंटू गुर्जर ने जिला अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद पदों से इस्तीफा दे दिया।