मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा आज सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। कांग्रेस पार्टी ने पहले इस बैठक का विरोध किया लेकिन आज प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार दोनों सीएम हाउस पहुंच गए। इधर 27% ओबीसी आरक्षण के जनक, पूर्व मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ अभी भी इस मीटिंग का विरोध कर रहे हैं। हालांकि उनको आमंत्रित भी नहीं किया गया है। बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव, कमलेश्वर पटेल और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट रामेश्वर ठाकुर, वरुण ठाकुर, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मनोज यादव, आम आदमी पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष रानी अग्रवाल शामिल हुए।
कांग्रेस ने पहले क्या शर्तें रखी थी
आमंत्रण मिलने के बाद कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ऐसी किसी भी बैठक का प्रस्ताव ठुकरा दिया था। उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर कुछ प्रमुख शर्तें रखी हैं। कहा है कि पहले शर्तों को पूरा करें उसके बाद में बैठक करेंगे। नेता प्रतिपक्ष श्री उमंग सिंघार ने जीतू पटवारी का समर्थन किया था। श्री जीतू पटवारी की शर्तें इस प्रकार है।
- सबसे पहले 27% ओबीसी आरक्षण का कानून लागू करें।
- मुख्यमंत्री एफिडेविट दें और कोर्ट में जितने पिटीशन पेंडिंग है सब वापस ले लें।
- 27% ओबीसी आरक्षण पर श्वेत पत्र जारी करें।
- जिन अधिकारियों ने 27% ओबीसी आरक्षण लागू होने में अड़चन डाली है, उनको दंडित करें।
- ओबीसी आरक्षण विवाद पर वकीलों को जो 30 करोड रुपए फीस दी गई है। उस पर भी श्वेत पत्र जारी करें।
मुख्यमंत्री ने सभी ओबीसी नेताओं को बुलाया है
सीएम हाउस में आयोजित सर्वदलीय बैठक में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने सभी पॉलिटिकल पार्टियों के ओबीसी नेताओं को बुलाया है। एक प्रकार से यह मध्य प्रदेश के सभी ओबीसी नेताओं की बैठक है। इसमें पिछड़ा वर्ग के सभी नेता मिलकर फाइनल करेंगे की 27% आरक्षण का क्या करना है। हम इस खबर को लगातार अपडेट करते रहेंगे इसलिए कृपया इस पेज को बुकमार्क करके रखिए।
सर्वदलीय बैठक जनता को गुमराह करने का षड्यंत्र: कमलनाथ
ओबीसी आरक्षण को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कटाक्ष किया है। उन्होंने X पर लिखा है कि ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर प्रदेश सरकार बार-बार अपने ही बुने जाल में फंस रही है। सर्वदलीय बैठक बुलाना भी जनता को गुमराह करने का षड्यंत्र है। जब कांग्रेस सरकार पहले ही 27% आरक्षण लागू कर चुकी है, तो सर्वदलीय बैठक की जरूरत ही क्यों? यह साफ है कि सरकार ओबीसी समाज को बरगलाने और भ्रमित करने की कोशिश कर रही है।