INDORE NEWS - नगर निगम में 107 करोड़ का घोटाला, 34 करोड़ की संपत्ति जप्त, सात FIR दर्ज

Updesh Awasthee
राजेश जयंत
, इंदौर नगर निगम में एक बार फिर भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (Enforcement Directorate - ED) ने चर्चित फर्जी बिल घोटाले में 34 करोड़ रुपये की 43 अचल संपत्तियां जब्त की हैं। ये संपत्तियां मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में हैं और इन्हें घोटाले की राशि से खरीदा गया था। इस घोटाले में निगम के इंजीनियर अभय राठौर, उनके परिवार के सदस्य और 15 से अधिक ठेकेदार शामिल हैं।  

जांच में पता चला कि निगम में 107 करोड़ रुपये की फर्जी फाइलें बनाई गईं, जिनमें बिना कोई काम किए 92 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। ठेकेदारों और अधिकारियों ने मिलकर फर्जी कंपनियां बनाईं, कागजों पर ही निर्माण कार्य दिखाया और बिल पास करवाए। राशि निकालने के लिए कर्मचारियों और श्रमिकों के नाम पर बैंक खाते खोले गए और घोटाले की राशि उन खातों के जरिए आपस में बांट ली गई। ED की छापेमारी में 22 करोड़ रुपये नकद भी जब्त किए गए।  

कई अधिकारियों व ठेकेदारों को गिरफ्तार किया

पुलिस ने इस मामले में सात FIR दर्ज की हैं और कई अधिकारियों व ठेकेदारों को गिरफ्तार किया है। मुख्य आरोपी अभय राठौर के साथ-साथ उनके परिवार के नाम की संपत्तियां भी अटैच की गई हैं। इसके अलावा, मोहम्मद एहतेशाम खान, मोहम्मद असलम खान, रहेल खान, बिल्किस खान, राहुल वढेरा, रेणु वढेरा, मोहम्मद जाकिर, मीरा शर्मा, राजेंद्र शर्मा, किरण सिरोजिया, राजकुमार साल्वी, शीला वढेरा आदि के नाम भी इस सूची में शामिल हैं।  

इस घोटाले की परतें तब खुलीं, जब निगम के लेखा विभाग ने बिलों की जांच शुरू की और पाया कि अधिकांश बिल फर्जी हैं। पुराने घोटाले में शामिल ठेकेदारों ने फिर से नए बिल लगाकर राशि निकालने की कोशिश की थी। कई फाइलें तो निगम के एक अधिकारी की कार से चोरी भी हो गई थीं, जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई।  

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने घोटाले के खुलासे के बाद सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, "सभी दोषियों को जेल भेजा जाएगा और भ्रष्टाचार किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" महापौर ने भरोसा दिलाया कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जाएगी और नगर निगम में transparency के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।  

ED की कार्रवाई के बाद इन संपत्तियों की खरीद-बिक्री पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जांच अभी भी जारी है और आगे और भी संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं। यह घोटाला सरकारी तंत्र में गहरे तक फैले भ्रष्टाचार, अधिकारी-ठेकेदार गठजोड़ और जनता के पैसों की खुली लूट का ताजा उदाहरण है।  
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