सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई और बर्खास्त पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पढ़िए

Updesh Awasthee
राज्य प्रशासनिक सेवा अथवा राज्य शासन के अंतर्गत किसी भी प्रकार की सेवा में संलग्न कर्मचारी अथवा अधिकारी को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311-एक का संरक्षण तो प्राप्त है परंतु भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के समान केंद्रीय कानून का संरक्षण प्राप्त नहीं है। कर्मचारी के खिलाफ जांच के आदेश, जांच की प्रक्रिया का पालन और अनुशासनिक कार्रवाई उस राज्य के सिविल सेवा नियमों के अंतर्गत होने चाहिए। अनुच्छेद 311-एक इस मामले में कर्मचारियों का संरक्षण नहीं करता। 

यूनियन ऑफ इंडिया बनाम बीवी गोपीनाथ, तमिलनाडु राज्य बनाम प्रमोद कुमार, आईएएस

प्रस्तुत मामला झारखंड राज्य का है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी के खिलाफ उपायुक्त द्वारा जांच की गई और दोषी पाए जाने पर बर्खास्त किया गया। जांच प्रस्ताव के लिए मुख्यमंत्री का अनुमोदन और जांच में दोषी पाए जाने के बाद राज्य लोक सेवा आयोग की सहमति एवं राज्यपाल का अनुमोदन लिया गया। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। बताया गया कि, यूनियन ऑफ इंडिया बनाम बीवी गोपीनाथ, 2014 (1) SCC 351 और तमिलनाडु राज्य बनाम प्रमोद कुमार, आईएएस, 2018 (17) SCC 677 के न्याय निर्देशों का पालन नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने आरोप पत्र को अलग से अनुमोदित नहीं किया इसलिए आरोप पत्र की कोई वैलिडिटी नहीं है। हाई कोर्ट की एकल पीठ और बाद में खंडपीठ ने भी इस दलील को उचित माना और राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी की सेवा समाप्ति को रद्द कर दिया। 

राज्य शासन में सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट ने "यूनियन ऑफ इंडिया बनाम बीवी गोपीनाथ, 2014 (1) SCC 351 और तमिलनाडु राज्य बनाम प्रमोद कुमार, आईएएस, 2018 (17) SCC 677" के निर्णय को लागू करने में गलती कर दी। यह मामला भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों का है, जिन्हें केंद्रीय कानून का संरक्षण प्राप्त है। राज्य के कर्मचारियों को राज्य के सिविल सेवा नियमों का पालन करना होता है भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311-एक के अंतर्गत किसी भी सरकारी कर्मचारियों को यह सुरक्षा प्राप्त कि, उसके नियोक्ता के अलावा कोई भी अन्य अधिकारी उसे बर्खास्त नहीं कर सकता। 

राज्य के कर्मचारियों के खिलाफ अनुशासनिक कार्रवाई करने के अधिकार सिविल सेवा नियमों के अनुसार किसी को भी हो सकता है। अनुशासनिक कार्रवाई की प्रक्रिया में भारतीय संविधान का अनुच्छेद 311-एक हस्तक्षेप नहीं करता है। विनम्र अनुरोध कृपया हमें गूगल न्यूज़ पर फॉलो करें। सबसे तेज अपडेट प्राप्त करने के लिए टेलीग्राम चैनल सब्सक्राइब करें एवं हमारे व्हाट्सएप कम्युनिटी ज्वॉइन करें।
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