BNS 22 - मानसिक विकृत व्यक्ति को उसके अपराध के लिए किस प्रकार की सजा, जानिए

Bhopal Samachar
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विकृत-चित्त (पागल) व्यक्ति वह व्यक्ति होता हैं जो मानसिक विकृति से पीड़ित होता है, इन व्यक्तियों को अच्छे-बुरे, सही-गलत में अन्तर समझ नहीं आता है। यह चार अवस्था में हो सकते हैं-
(1). जड़-बुद्धि व्यक्ति (जन्म से ही पागल हो)।
(2). विक्षिप्त व्यक्ति (बीच-बीच में पागलपन के दौरे आना)।
(3). मानसिक दौर्बल्य (लंबी बीमारी के कारण पागल हो जाना)।
(4). मानसिक बीमारी।
उपर्युक्त व्यक्ति को भारतीय न्याय संहिता में विकृत-चित (पागल) व्यक्ति कहा गया है। इनके द्वारा किया गया अपराध कब क्षमा योग्य होगा जानिए।

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 22 की परिभाषा 

भारतीय दंड संहिता में यह अपराध धारा 84 के अंतर्गत दर्ज किया गया था। कोई विकृत-चित व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध अपराध नहीं माना जायेगा क्योंकि ऐसे व्यक्ति को अच्छे-बुरे की पहचान नहीं होती है ना ही उनको कोई समझने की शक्ति होती है, इसलिए ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया अपराध BNS की धारा 22 के अंतर्गत क्षमा योग्य होगा।
नोट:- शराब या नशीली चीज (गांजा, ड्रग्स आदि) करके किया गया अपराध किसी भी प्रकार से क्षमा योग्य नहीं होगा। 

सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय

सेराली वली मोहम्मद बनाम महाराष्ट्र राज्य, एआईआर 1972 एससी 2443 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून 18 वर्ष से अधिक आयु के हर व्यक्ति को तब तक स्वस्थ मानता है जब तक कि इसके विपरीत साबित न हो जाए कि वह मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है। बीएनएस की धारा 22 (आईपीसी की धारा 84) के तहत बचाव पाने के लिए, अभियुक्त को यह साबित करना होता है कि चित्त-विकृति होने के कारण वह कार्य की प्रकृति को जानने में असमर्थ था या यह कार्य कानून के विपरीत था।

बीएनएस की धारा 22 के बारे में कुछ और बातेंः

यह धारा विकृतचित्त व्यक्ति के कृत्य से जुड़ी है।
यह धारा कानूनी उन्मत्तता से जुड़ी है, न कि चिकित्सीय उन्मत्तता।
इस धारा के तहत, मानसिक बीमारी वाले व्यक्ति पर कोई दोष नहीं लगाया जाता। 
इस धारा के तहत, कानून द्वारा मानसिक स्वास्थ्य सुविधाएं दी जाती हैं या इलाज के लिए किसी संस्था में भेज दिया जाता है। अपराधी को स्वतंत्र नहीं किया जाता।
इस धारा के तहत बचाव का दावा करने के लिए, चिकित्सा समझ की बजाय कानूनी समझ को समझना चाहिए।

लेखक✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद)। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

डिस्क्लेमर - यह जानकारी केवल शिक्षा और जागरूकता के लिए है। कृपया किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से पहले बार एसोसिएशन द्वारा अधिकृत अधिवक्ता से संपर्क करें। 

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