अपराध के साक्ष्य को नष्ट करने या विलोपित करने वाले को क्या दंड दिया जाता है - legal advice

जब कोई व्यक्ति अपराध करता है तो उसके मित्र या नातेदार उसे बचाने का हर संभव प्रयास करते हैं ताकि उसे दण्ड से बचाया सके। जैसे कि ब्रिज किशोर बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में ससुर ने अपनी पुत्र वधु की आत्महत्या की झूठी रिपोर्ट दर्ज करवा दी, वास्तव मे बहु की हत्या की गई थी। भारत में अपराधी को बचाना भी एक अपराध है। इस प्रकार के अपराधियों को किस कानून के तहत क्या दंड दिया जाता है। जानिए:-

भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 238 एवं भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की धारा 201 की परिभाषा

यदि कोई व्यक्ति किसी अपराध के होने के साक्ष्य को नष्ट करता या आरोपी को अपराध से बचाने के लिए उसका साथ देता है या साक्ष्यों को, तथ्यों को नष्ट करता है या छिपाता है तब ऐसा व्यक्ति BNS की धारा 238 अथवा IPC की धारा 201 के अंतर्गत दोषी होगा।
इस अपराध के होने के अवश्यक तत्व निम्न है:-
1. कोई अपराध हुआ होना चाहिए।
2. आरोपी यह जानता है कि अपराध हुआ था और उसे इसका पर्याप्त कारण भी मालूम था।
3. अगर के तथ्यों के बारे में पता होने के बाद भी झूठी जानकारी दी है।
4. आरोपी ने अपराध के साक्ष्यों को गायब किया हो या नष्ट किया हो।

Bharatiya Nyaya Sanhita Section 238 or Indian Penal Code Section 201 Provision of punishment

यह अपराध संज्ञेय एवं असंज्ञेय दोनों प्रकार के होते हैं एवं यह जमानतीय अपराध होते हैं, अर्थात पुलिस थाने में इस अपराध की एफआईआर भी दर्ज हो सकती है एवं इस अपराध के लिए परिवाद भी न्यायालय में लगाया जा सकता है। इस धारा के अपराध के दंड को तीन भागों में बांटा गया है :-
1. ऐसे अपराध के साक्ष्यों को नष्ट किया है जिस अपराध को सजा मृत्यु दण्ड है तब आरोपी को सात वर्ष की कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा। यह अपराध संज्ञेय एवं असंज्ञेय दोनों प्रकार का होगा एवं इस अपराध की सुनवाई सेशन कोर्ट द्वारा होगी।

2. अगर आजीवन कारावास से 10 वर्ष से दण्डित अपराध को जानकारी को विलोपित किया है या नष्ट किया है तब आरोपी को तीन वर्ष को कारावास और जुर्माने से दण्डित किया जाएगा। यह अपराध असंज्ञेय होगा एवं मामले की सुनवाई प्रथम वर्ग मजिस्ट्रेट द्वारा की जाती है।

3. यदि अपराध 10 वर्ष से कम का है तब आरोपी को उस अपराध की अधिकतम सजा के एक चौथाई भाग से दण्डित किया जाएगा। यह अपराध असंज्ञेय होगा एवं मामले की सुनवाई उसी न्यायालय में होगी जहा पहले का कोई अपराध विचारणीय है। लेखक✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद)। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

डिस्क्लेमर - यह जानकारी केवल शिक्षा और जागरूकता के लिए है। कृपया किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई से पहले बार एसोसिएशन द्वारा अधिकृत अधिवक्ता से संपर्क करें। 

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