मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारी का मुद्दा भी घोषणा पत्र में शामिल कीजिए - Khula khat


माननीय प्रधान मंत्री जी, नमस्कार, जैसा की आपके पत्र में लिखा है की देश की 140 करोड़ जनता मेरा परिवार है। मेरी सरकार युवाओं की सरकार है, गरीबों की सरकार है। आपका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं की मध्यप्रदेश के सरकारी विभागों मे विगत कई वर्षों से आउटसोर्स कर्मचारी (डाटा एंट्री ऑपरेटर/कंप्यूटर ऑपरेटर) रखे गए हैं जो पूरी मेहनत, लगन और ईमानदारी से सरकार का काम करते हैं। किंतु इन आउटसोर्स कर्मचारियों वेतन के नाम पर मिलता है तो मजदूरी दर महीने का 9 से 10 हजार रुपए मात्र जो आज के इस मंहगाई के दौर मे ऊंट के मुंह मे जीरा के समान है।

इसलिए मेरा सरकार से सवाल है की जब आउटसोर्स कर्मचारी (डाटा एंट्री ऑपरेटर/कंप्यूटर ऑपरेटर) सरकारी विभाग मे सरकारी कर्मचारियों के बराबर ही काम कर रहे हैं तो क्या कारण है की इन आउटसोर्स कर्मचारियों को मजदूरों/श्रमिकों की श्रेणी मे रखा गया है और वेतन के नाम पर महीने का मात्र 9 से 10 हजार रुपए ही दिया जाता है? और क्यों आउटसोर्स पर काम करने वाले इन लाखों गरीब युवाओं के साथ सौतेला व्यवहार करके शोषण किया जा रहा है?

इसलिए मेरा अपने देश के लोकप्रिय, जन हितैषी यशस्वी प्रधानमंत्री जी से करबद्ध निवेदन है की हम आउटसोर्स (डाटा एंट्री ऑपरेटर/कंप्यूटर ऑपरेटर) कर्मचारियों की पीड़ा को समाप्त करने की कृपा करें और निम्नानुसार लाभ दिलवाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार को निर्देशित करने की महान कृपा करें मध्यप्रदेश का समस्त आउटसोर्स कर्मचारी वर्ग आपका सदा आभारी रहेगा –

1.  आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव 2023 के संकल्प पत्र के पेज नंबर 81 के बिंदु क्रमांक 7 पर लिखा था की हम मध्यप्रदेश के समस्त आउटसोर्स कर्मचारियों की वेतन वृद्धि करेंगे और संविदा का लाभ देंगे। जिसे अभी तक पूरा नही किया गया है। जिसे पूरा करवाने की कृपा करें 🙏

2.  आउटसोर्स कर्मचारियों को कभी भी सेवा से पृथक कर दिया जाता है ऐसे मे कई वर्षों तक विभाग मे काम करने वाला युवा बेरोजगार हो जाता है दूसरी नौकरी करने के लिए उसकी उम्र भी समाप्त हो चुकी होती है। आउटसोर्स कर्मचारियों की भी सेवा अवधि सरकारी कर्मचारियों की तरह ही 62 वर्ष तक की जाए।

3.  आउटसोर्स कर्मचारियों (डाटा एंट्री ऑपरेटर/कंप्यूटर ऑपरेटर) का वेतन कंपनी(ठेकेदार) के मध्यम से ना दिया जाकर सीधे जो आउटसोर्स कर्मचारी जिस विभाग मे कार्य कर रहा है उसी विभाग से सीधे वेतन दिया जाए। क्योंकि कंपनी(ठेकेदार) वेतन देने मे 5 से 6 महीने तक का समय लगा देती हैं और वेतन का 50% तक अपने जेब मे डाल लेती हैं जिससे आउटसोर्स कर्मचारियों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ता है। 

4.  आउटसोर्स (डाटा एंट्री ऑपरेटर/कंप्यूटर ऑपरेटर) कर्मचारियों को मजदूरों/श्रमिकों की श्रेणी मे ना रखा जाए क्योंकि हम आउटसोर्स कर्मचारी भी सरकारी कर्मचारियों के समान ही कार्य करते हैं। इसलिए हम आउटसोर्स कर्मचारियों को भी मिनिमम 25000 रुपए प्रति माह दिया जाए जिससे हमारा भी घर परिवार अच्छे से चल सके।

हम सभी आउटसोर्स (डाटा एंट्री ऑपरेटर/कंप्यूटर ऑपरेटर) कर्मचारियों को आशा ही नही पूर्ण विश्वास है की हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी हमारी पीड़ा को समझेंगे और हमारी इस पीड़ा को समाप्त करने के लिए मध्यप्रदेश सरकार को निर्देशित करेंगे🙏🙏
धन्यवाद, RAJESH KUMAR <deorajesh8@gmail.com> 

अस्वीकरण: खुला-खत एक ओपन प्लेटफार्म है। यहां मध्य प्रदेश के सभी जागरूक नागरिक सरकारी नीतियों की समीक्षा करते हैं। सुझाव देते हैं एवं समस्याओं की जानकारी देते हैं। पत्र लेखक के विचार उसके निजी होते हैं। इससे पूर्व प्रकाशित हुए खुले खत पढ़ने के लिए कृपया Khula Khat पर क्लिक करें. यदि आपके पास भी है कुछ ऐसा जो मध्य प्रदेश के हित में हो, तो कृपया लिख भेजिए हमारा ई-पता है:- editorbhopalsamachar@gmail.com

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