BNS 34, IPC 96 - यदि किसी अन्य व्यक्ति की रक्षा करते हुए कोई अपराध हो जाए, तो क्या होगा

Legal general knowledge and law study notes

भारतीय न्याय संहिता (भारतीय दंड संहिता) में भारत के प्रत्येक नागरिक को आत्मरक्षा का अधिकार प्राप्त है। पिछले लेख में इसके बारे में बताया गया है। यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं। आज हम आपको बताएंगे कि यदि अन्य किसी व्यक्ति की रक्षा करते हुए, कोई ऐसा काम हो जाए, जो अपराध की श्रेणी में आता है, तब क्या होगा। आपको सजा मिलेगी या माफ कर दिया जाएगा। पढ़िए:- 

भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 35 एवं भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 97 की परिभाषा

कोई भी व्यक्ति अपने शरीर की या अन्य व्यक्ति के शरीर की एवं अपनी चल-अचल सम्पति एवं अन्य व्यक्ति की चल-अचल संपत्ति की प्रतिरक्षा स्वयं कर सकता है। अगर रक्षा करते समय कोई अपराध हो जाता है तब भारतीय दंड संहिता की धारा 97 एवं भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 के अंतर्गत अपराध नहीं होगा।

उधारानुसार वाद【दयाराम बनाम राज्य】:

उपर्युक्त मामले में यह अभिनिर्धारित किया गया कि जहाँ कुछ अपराधी, किसी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध बलपूर्वक उठा कर ले जा रहा हैं, तब उस महिला के हितचिंतको से यह अपेक्षा नहीं कि जा सकती थी कि वे पुलिस में शिकायत दर्ज करा कर पुलिस के आने की प्रतीक्षा में हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। अपितु वे प्राइवेट प्रतिरक्षा के अधिकार का प्रयोग करते हुए उस महिला को मुक्त करने के लिए अपहरण कर्ताओं पर हमला कर सकते हैं। इस प्रकार का अपराध भारतीय दंड संहिता की धारा 97 के तहत क्षमा कर दिया जाएगा।

The Bharatiya Nyaya Sanhita, 2023 section 35, Indian Penal Code, 1860 section 97 Punishment

भारतीय न्याय संहिता की धारा 35 अथवा भारतीय दंड संहिता की धारा 97 के तहत किसी भी प्रकार का कोई दंड प्रावधान नहीं है। इसमें अपराध से क्षमा का प्रावधान है। यदि क्षमता नहीं किया जाता है तो उस धारा के तहत दंडित किया जाएगा, जो कि उसे अपराध के लिए निर्धारित की गई है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) 

:- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं विधिक सलाहकार होशंगाबाद) 9827737665 , इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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