MP POLICE रिकॉर्ड से दस्तावेज गायब, हाई कोर्ट ने बर्खास्त सिपाही को बहाल किया - MP NEWS

मध्य प्रदेश पुलिस ने 23 साल पहले अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए एक आरक्षक को बर्खास्त कर दिया था। आरक्षक द्वारा पुलिस विभाग की इस कार्रवाई को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनौती दी गई। मामले के परीक्षण के दौरान पुलिस डिपार्टमेंट आरक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई के डॉक्यूमेंट प्रस्तुत नहीं कर पाया। इसके कारण हाईकोर्ट ने बर्खास्त कांस्टेबल को बहाल करने के आदेश जारी कर दिए। 

पत्नी के बाद दूसरी महिला ने दहेज एक्ट का मामला दर्ज कर दिया था

याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता उदयन तिवारी ने रखा। उन्होंने दलील दी कि पिता की मृत्यु के बाद सागर निवासी याचिकाकर्ता एससी पांडे को 10 वीं बटालियन सागर में आरक्षक के पद पर अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। याचिकाकर्ता ने 1991 में माया देवी से शादी की थी। विवाद होने पर माया देवी ने कोर्ट में वैवाहिक परिवाद दायर किया। इसी बीच पुष्पा बाई नामक महिला ने खुद को याचिकाकर्ता की पत्नी होने का दावा किया और उसके विरुद्ध दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया। इस मामले में याचिकाकर्ता दोषमुक्त हो गया।

बिना अनुमति दूसरी शादी करने के आरोप में सेवामुक्त

याचिकाकर्ता को बिना अनुमति दूसरी शादी करने के आरोप में चार्जशीट जारी की गई। जांच के बाद याचिकाकर्ता को सेवामुक्त कर दिया गया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पाया कि पूरी जांच होने के बाद अधिकारियों ने उक्त निर्णय लिया था। हालांकि शासन की ओर से बताया गया कि वर्ष 2000 में याचिकाकर्ता को बर्खास्त किया गया और उसके अनुशासनात्मक दस्तावेज गुम हो गए हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि इतने वर्षों बाद बिना दस्तावेजों के सेवामुक्ति के आदेश का परीक्षण नहीं किया जा सकता। 

न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने अपने आदेश में साफ किया कि जो स्थिति इस मामले में सामने आई है, उसे देखते हुए चार्जशीट और जांच रिपोर्ट का कोई औचित्य नहीं रह गया है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि याचिकाकर्ता की आयु भी अधिक हो गई है और समय भी बहुत बीत गया है, इसलिए उसे सेवा से अलग करने का आदेश निरस्त करना उचित है। 

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