BHOPAL NEWS- जमीन से निकले प्रतिहार काल के प्राचीन सूर्य मंदिर का जीर्णोद्धार

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में, आठवीं सदी में प्रतिहार राजाओं ने एक भव्य सूर्य मंदिर बनाया था। 21वीं सदी में जब मुगलों द्वारा ध्वस्त किए गए मंदिरों का मालवा हटाया जा रहा था तब मलबे के नीचे से यह प्राचीन सूर्य मंदिर प्रकट हुआ। अब इस मंदिर का जीवन उधर किया जा रहा है। अगले साल से भोपाल में विश्व प्रसिद्ध प्राचीन सूर्य मंदिर में विधिवत सूर्य पूजा शुरू हो जाएगी। 

सूर्य मंदिर के किनारे तालाब का घाट भी बनाया जाएगा

संचालनालय पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय, मध्यप्रदेश ने भोजपुर के पास स्थित आशापुरी मंदिर समूह के उन्नयन का कार्य गत वर्ष आरंभ किया है। इसके अंतर्गत ध्वस्त मंदिरों का मलबा हटाकर सफाई कार्य कराया गया है, जिसमें 24 भूमिगत मंदिरों के अवशेष प्रकाश में आए। इनमें सात मंदिर प्रतिहार काल और 17 परमार काल के थे। मप्र पुरातत्व विभाग द्वारा इन मंदिरों के जीर्णोद्धार की योजना तैयार की गई, जिसमें इन मंदिरों के मूल वास्तु खंडों को जोड़कर मंदिरों की पुनर्संरचना का कार्य शामिल है। योजना के प्रथम चरण में भूतनाथ मंदिर परिसर स्थित प्रतिहार काल के मंदिर क्रमांक-17 (सूर्य मंदिर) का कार्य किया गया है। इसके साथ ही तालाब के घाट का पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। यह पूरा प्रोजेक्ट मप्र पुरातत्व विभाग के पुरातत्वविद डा. रमेश यादव के दिशा-निर्देशन में किया जा रहा है। 

भोपाल का प्राचीन सूर्य मंदिर जैसा आठवीं सदी में था वैसा ही दिखेगा

डा. रमेश यादव ने बताया कि 30 लाख की लागत से नवमीं शताब्दी के सूर्य मंदिर का पुनर्निर्माण छत तक पूरा हो चुका है। शिखर का निर्माण शेष है, जो दो माह में पूरा हो जाएगा। मंदिर को ठीक वैसा ही बनाया जा जा रहा है, जैसा वह पहले रहा होगा। मलबे में मिले मंदिर के अवशेषों को चिह्नत कर उन्हें पुन: स्थापित किया गया है। वहीं, तालाब के घाट का निर्माण 60 लाख की लागत से निजी ठेकेदार के माध्यम से कराया जा रहा है। प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में तीन और मंदिरों का कार्य इसी वर्ष आरंभ होगा। दस साल में पूरे 24 मंदिरों के उन्नयन का लक्ष्य है। 

भोपाल का नया तीर्थ स्थल आशापुरी धाम

धर्मिक पर्यटन स्थल आशापुरी में तीन मंदिर समूह हैं। इनमें सबसे बड़ा है भूतनाथ मंदिर समूह, जिसमें 24 मंदिरों के अवशेष हैं। बिलौटा (सहस्र लिंग परिसर) में चार मंदिरों के तथा जैन मंदिर परिसर में एक विशाल जैन मूर्ति और अन्य मंदिरों के अवशेष हैं। 

प्राचीन मंदिरों का समूह है आशापुरी

भोपाल से करीब 35 किमी और भोजपुर से पांच किमी दूर आशापुरी प्राचीन मंदिरों का समूह है। यहां पर तालाब के आसपास 26 प्राचीन मंदिर क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं। यह मंदिर पत्थरों से बने हुए हैं और सुंदर मूर्तियों की सुंदर नक्काशी की गई है। एक हजार साल पहले बने ये मंदिर भगवान शिव और आशापुरी देवी को समर्पित हैं। वहीं तालाब को भूतेश्वर बांध के नाम से जाना जाता है। आशापुरी गांव में संग्रहालय भी देखने के लिए मिलता है। यह स्थानीय संग्रहालय है और यहां पर बहुत सारी मूर्तियों का संग्रह है। ये मंदिर मुस्लिम आक्रमण के बाद प्राकृतिक आपदा और लोहे में जंग लगने से क्षतिग्रस्त हुए हैं। 

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