मगरमच्छ के आंसुओं को नकली क्यों माना जाता है, वैज्ञानिक कारण पढ़िए- Bhopal Samachar GK

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Amazing facts in Hindi about crocodile tears

मगरमच्छ के आंसू वाला मुहावरा तो हम सभी ने सुना है। जब कोई व्यक्ति किसी जगह पर नकली दुख व्यक्त कर रहा होता है तब कहा जाता है कि वह मगरमच्छ के आंसू बहा रहा था। या फिर उससे कहा जाता है कि, मगरमच्छ के आंसू मत बहाओ। यानी मगरमच्छ के आंसुओं में दुख नहीं होता। सवाल यह है कि मगरमच्छ के आंसुओं को नकली क्यों माना जाता है, और भी कई जानवर आंसू बहाते। उनके बारे में कोई कुछ क्यों नहीं कहता, आइए आज 1 मिनट मिनट से भी कम समय में यही जानने की कोशिश करते हैं।

मगरमच्छ के आंसू कब निकलते हैं - Crocodile's Tear 

चूँकि मगरमच्छ असमतापी जीव (Poikilothermic) है, जो कि अपने शरीर का तापमान वातावरण के अनुसार नियंत्रित नहीं कर पाता। लवणीय जल में रहने के कारण इसके शरीर में नमक की बहुत अधिक मात्रा हो जाती है। इस कारण उस एक्स्ट्रा नमक को बाहर निकालने के लिए यह समय-समय पर आंसू बहाता रहता है, जो कि बिल्कुल भी इमोशनल नहीं होते। इसीलिए कहावत में मगरमच्छ का यूज़ किया गया है क्योंकि इसके आँसू बिल्कुल भी असली नहीं होते बल्कि नकली आंसू होते हैं। जो कि अपने शरीर के Excess Salt को बाहर निकालने के लिए निकाले जाते हैं।

मगरमच्छ का दिल 

मगरमच्छ और बंदर वाली कहानी भी आपने पढ़ी होगी। किस प्रकार मगरमच्छ के भोलेपन का फायदा उठाया जाता है। कैसे मगरमच्छ, खतरनाक होने के बावजूद दूसरों की मदद करता है। दरअसल, मगरमच्छ (Crocodile) जंतु जगत के संघ (Phylum) सरीसृप (Reptilia)का मेंबर है परंतु सभी रेप्टाइल्स की तरह मगरमच्छ का ह्रदय (Heart) थ्री चैंबर्ड नहीं होता बल्कि इसका ह्रदय मनुष्यों की तरह 4 Chambered होता है। यानी मगरमच्छ भी बड़े दिलवाला है। 

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