MP NEWS- हाईकोर्ट में हाजिरी की बारी आई तो कर्मचारी को बैकडेट में प्रमोशन दे दिया

ग्वालियर
। जब नौकरशाहों की बात आती है तो नियम और कानून की परिभाषा बदल जाती है। सन 2016 में डीपीसी के बावजूद एक अधिकारी का प्रमोशन रोकने वाले आईएएस ऑफिसर को बचाने के लिए सन 2024 में आदेश जारी कर दिया क्या जो बैकडेट में था। यह मामला हाईकोर्ट में पहुंच गया था और उच्च न्यायालय के विद्वान न्यायाधीश ने डिपार्टमेंट के डायरेक्टर को तलब कर लिया था। 

दिनेश कुमार द्विवेदी विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन- शासकीय सेवा में प्रमोशन विवाद

श्री दिनेश कुमार द्विवेदी मध्य प्रदेश शासन के उद्यानिकी विभाग में कार्यरत थे एवं वर्तमान में रिटायर हो चुके हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका लगाकर बताया कि 28 जनवरी 2016 को हुई डीपीसी में उन्हें सीनियर एग्रीकल्चर एक्सटेंशन ऑफिसर के पद पर प्रमोशन दिए जाने का फैसला हुआ था परंतु तब से लेकर रिटायरमेंट तक पदोन्नति के आदेश जारी नहीं हुए। 

डीपीसी की वैलिडिटी और प्रमोशन का अधिकार

उद्यानिकी विभाग की ओर से हाईकोर्ट में जवाब प्रस्तुत किया गया की डीपीसी की वैलिडिटी 18 होती है। याचिकाकर्ता को 28 जनवरी 2016 की डीपीसी में प्रमोशन देने का फैसला हुआ था। 18 महीने की अवधि बीत चुकी है। अब कुछ नहीं कर सकते। इस जवाब पर उच्च न्यायालय में नाराजगी जताते हुए उद्यानिकी विभाग के निदेशक को तलब कर लिया। हाईकोर्ट ने पूछा कि यदि 2016 की डीपीसी को लागू नहीं किया गया है तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है। 

जैसे ही यह स्थिति बनी, उद्यानिकी विभाग की निदेशक निधि निवेदिता ने यू टर्न ले लिया। उन्होंने इस परिस्थिति के लिए जिम्मेदार अपने समकक्ष का नाम नहीं बताया बल्कि याचिकाकर्ता दिनेश कुमार द्विवेदी का प्रमोशन ऑर्डर जारी कर दिया और उच्च न्यायालय को बताया गया कि उन्हें 2016 से ही प्रमोशन का लाभ दिया जा रहा है।

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