यदि जनरल डिब्बा ठसाठस भरा हो तो क्या किसी और बोगी में यात्रा कर सकते हैं- GK Today

कई बार ऐसा होता है जब ट्रेन का जनरल डिब्बा ठसाठस भरा होता है। उसमें पैर रखने की जगह भी नहीं होती। सवाल यह है कि क्या ऐसी स्थिति में द्वितीय श्रेणी के टिकट के आधार पर ट्रेन की किसी दूसरी बोगी (आरक्षित श्रेणी की) में यात्रा की जा सकती है। आइए जानते हैं:- 

द्वितीय श्रेणी का जनरल टिकट यात्रा के लिए होता है ट्रेन के लिए नहीं

हां बिल्कुल कर सकते हैं परंतु इसकी कुछ शर्तें भी हैं। रेल अधिनियम, 1989 - the railways act, 1989 के तहत द्वितीय श्रेणी के ट्रेन टिकट की वैलिडिटी निर्धारित होती है। यदि यात्रा 199 किलोमीटर या इससे कम दूरी की है तो टिकट की वैलिडिटी 3 घंटे और यदि इससे अधिक है तो 24 घंटे होती है। यदि आपके पास द्वितीय श्रेणी का ट्रेन टिकट है। जनरल कोच में पैर रखने की जगह भी नहीं है तब रेलवे एक्ट के अनुसार आपको अगली ट्रेन का इंतजार करना चाहिए। क्योंकि टिकट यात्रा के लिए बनाया गया है, किसी विशेष ट्रेन के लिए आरक्षित नहीं किया गया। 

रेलवे अधिनियम की धारा 138- जनरल टिकट पर स्लीपर क्लास में यात्रा का अधिकार

यदि टिकट की वैलिडिटी लिमिट के भीतर किसी दूसरी ट्रेन का विकल्प उपलब्ध नहीं है तब आप स्लीपर क्लास में यात्रा के लिए ट्रेन के भीतर प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन किसी भी खाली सीट पर बैठने का अधिकार नहीं है। रेलवे अधिनियम की धारा 138 के तहत ट्रेन में प्रवेश करते ही सबसे पहले आपको TTE की खोज करनी होगी या फिर किसी ऐसे स्थान पर खड़े रहकर उसकी प्रतीक्षा करनी होगी, जिससे अन्य यात्रियों को परेशानी ना हो। 

TTE के आते ही आपको बताना होगा कि किन परिस्थितियों में आपने स्लीपर क्लास में प्रवेश किया है। यदि कोई सीट खाली है तो TTE आप सही दोनों श्रेणियों की यात्रा की टिकट का अंतर लेकर आपके लिए स्लीपर क्लास का टिकट बना देगा। यदि कोई सीट खाली नहीं है तो आपको अगले स्टेशन तक यात्रा करने की अनुमति देगा। यदि आप उसके बाद भी स्लीपर क्लास से बाहर नहीं जाते हैं तो ₹250 का जुर्माना अदा करके आप अपनी यात्रा कंटिन्यू कर सकते हैं। यदि आपके पास ₹250 नहीं है तब TTE आपका चालान बना देगा और आप यात्रा पूरी करने के बाद न्यायालय में ₹250 जमा कर सकते हैं। 

कुल मिलाकर उपरोक्त परिस्थितियों में जब तक जनरल कोच में आपके प्रवेश की गुंजाइश नहीं बनती तब तक आपको ट्रेन से धक्के देकर नीचे नहीं उतारा जा सकता और ना ही जुर्माना अदा न करने की स्थिति में आपका सामान जप्त किया जा सकता है। 

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