MP SIC NEWS- अब सरकारी कागज गायब हुआ तो अधिकारी को 5 साल की जेल, GAD को निर्देश

भोपाल
। मध्यप्रदेश में अब यदि किसी भी सरकारी ऑफिस से कोई सरकारी कागज गायब हुआ तो जिम्मेदार अधिकारी को The Public Records Act, 1993 के तहत 5 साल की जेल हो सकती है। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग (MPSIC) के आयुक्त श्री राहुल सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग को सरकारी दस्तावेजों की सुरक्षा के लिए मध्यप्रदेश में पब्लिक रिकॉर्ड्स एक्ट 1993 लागू करने का निर्देश दिया है। सनद रहे कि जब से सूचना का अधिकार अधिनियम लागू हुआ है तब से सरकारी फाइलों के गायब होने की घटनाएं बढ़ गई हैं। 

मध्यप्रदेश में The Public Records Act, 1993 लागू करो: MPSIC

शासकीय कार्यालयों में लगातार गायब होते कागज और फाइलों से चिंतित मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सामान्य प्रशासन विभाग को मध्य प्रदेश का पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट बनवाने के लिए निर्देशित किया है। साथ में जब तक मध्यप्रदेश का पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट बनकर लागू नहीं होता है तब तक श्री सिंह ने विभाग को केंद्र के पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के अनुरुप गाइडलाइंस तैयार कर फाइलों का प्रबंधन और उसके गायब होने पर दोषी कर्मचारियों या अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्यवाही जिसमे 5 साल तक का कारावास और ₹ 10000 तक का जुर्माना शामिल है, सुनिश्चित करने को भी कहा है।  

मध्यप्रदेश में दस्तावेजों की सुरक्षा का कोई कानून ही नहीं है: सूचना आयुक्त राहुल सिंह

सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में कहा कि आयोग के लिए चिंता का विषय है कि मध्यप्रदेश में शासकीय कार्यालयों में रिकॉर्ड की देखरेख प्रबंध पद्धति में सुधार लाने सुरक्षा प्रबंधन एवं रिकॉर्ड गुम या चोरी होने, गलत तरीके से नष्ट करने पर दोषी अधिकारी या कर्मचारी की जवाबदेही तय करने के लिए राज्य का अपना पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट ही नहीं है। 

सरकारी दस्तावेजों की रक्षा के लिए केंद्र ने पुख्ता कानून बनाया है: राहुल सिंह

सिंह ने अपने आदेश में कहा कि कागजों के गायब होने पर अधिकारियों के उदासीन बस रवैए के पीछे एक बड़ी वजह यह भी है कि इस तरह के मामलों में कार्रवाई करने के लिए एक मुकम्मल विधिक व्यवस्था पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट जो केंद्र एवं अन्य राज्यों में उपलब्ध है पर मध्यप्रदेश में उपलब्ध नहीं है। सिंह ने यह स्पष्ट करते हुए की केंद्र के पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट रिकॉर्ड गायब होने होने पर दोषी अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध 5 साल तक के कारावास एवं ₹10000 जुर्माने का प्रावधान है या दोनों से दंडनीय करने का भी प्रावधान है।

MP NEWS- राज्य सूचना आयोग में दस्तावेज गायब होने के कई मामले आते हैं

आयुक्त राहुल सिंह अपने आदेश में कहा कि राज्य सूचना आयोग में दस्तावेजों के गायब होने के कई प्रकरण सामने आते रहे और प्रशासनिक स्तर पर इसे बिल्कुल सतही स्तर पर नहीं देखा जा सकता है। इन गायब कागजों के चलते कई मामलों में तो लोगों का जीवन और कैरियर तक दांव पर लग जाते हैं। शासकीय कार्यालय में से किसी के जमीन के कागज गायब है। नियुक्ति में गड़बड़ी के कागज गायब है। जांच संबंधित दस्तावेज गायब है। भ्रष्टाचार घोटाले से संबंधित प्रकरण में दस्तावेज गायब है। किसी व्यक्ति या संस्था को प्रभावित करने वाला कोई महत्वपूर्ण आदेश गायब है, तो कहीं किसी शासकीय अधिकारी के विरूद्ध की गई कार्रवाई की कागज गायब है।

आयुक्त राहुल सिंह ने बताया, गायब दस्तावेज कैसे अपने आप प्रकट हो जाते हैं

कई मामलों में जब आयोग द्वारा संबंधित लोक प्राधिकारी को मामले में पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहा जाता है तो यह भी हुआ है कि आपराधिक मामला कायम होता देख यह गायब कागज वापस अवतरित हो जाते हैं। श्री सिंह ने कहा कि गायब कागजों को लेकर अधिकारियों के उदासीन रवैया देखा गया है। ऐसा नहीं है कि गायब कागजों की आम नागरिक परेशान होते हैं। रिकॉर्ड को लेकर लापरवाही का शिकार राजकीय अधिकारियों कर्मचारी भी हो जाते हैं। शासकीय कर्मचारी अधिकारियों के विभागीय रिकॉर्ड गुम हो जाने से उनके सेवाकाल एवं सेवानिवृत्ति के समय अधिकारी कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।  

RTI का आवेदन तक गायब कर देते हैं

मजेदार बात यह है कि जिस अपील प्रकरण में राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने सरकार को पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट लाने के लिए कहा है। उस प्रकरण में ना केवल आरटीआई आवेदन में जिस जानकारी को मांगा था उससे संबंधित दस्तावेज गायब है बल्कि सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्रस्तुत किया गया आवेदन भी रिकॉर्ड से गायब हो गया है।

सरकारी रिकॉर्ड के प्रति मध्यप्रदेश की व्यवस्था में गंभीरता नहीं: आयुक्त राहुल सिंह

फिलहाल मध्य प्रदेश में पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के ना होने से गायब या गुम हो गई फाइलों के संबंध में दोषी अधिकारी या कर्मचारियों के विरुद्ध मध्य प्रदेश सेवा शर्त नियम के अधीन कार्रवाई की जाती है। लेकिन निश्चित नियम-प्रक्रिया के अभाव में कोई पुख्ता कार्रवाई नहीं हो पाती है। सिंह ने आदेश में इस बात पर भी चिंता जाहिर कि गुम हो गए रिकॉर्ड को पुनः निर्मित करने की प्रक्रिया भी विधिक रुप से मध्यप्रदेश में सुनिश्चित नहीं है। 

गायब दस्तावेज की थाने में गुमशुदगी भी दर्ज होनी चाहिए

सिंह ने कहा कि गायब या गुम कागजों को लेकर संबंधित दोषी अधिकारी कर्मचारी की जवाबदेही और उनके विरुद्ध कार्रवाई विभागीय स्तर पर समयबद्ध तरीके से सुनिश्चित होनी चाहिए। अगर जानबूझकर किसी के द्वारा कागज गायब करवाया गया है तो आईपीसी की सुसंगत धाराओं के तहत पुलिस में उक्त अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध FIR दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए। 

3 साल से दस्तावेज गायब, 3 SDM के खिलाफ जुर्माना की कार्रवाई

श्री सिंह ने अपील प्रकरण जिसमें जाति प्रमाण पत्र की जानकारी मांगी थी उसकी सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किए हैं। इस प्रकरण में ना केवल जाति प्रमाण पत्र कार्यालय से गायब है, बल्कि जो जानकारी मांगने के लिए जो आरटीआई आवेदन दायर हुआ था वह भी कार्यालय से गायब हो चुका है। वही पिछले तीन साल से इस प्रकरण में गुम हुए कागज के लिए किसी की जवाबदेही भी तय नहीं की गई है। इस प्रकरण में सूचना  आयोग ने तीन दोषी SDM अधिकारियों के विरुद्ध ₹ 58000 का जुर्माना लगाया गया है। 

66 सालों में पहली बार गायब होते दस्तावेजों के लिए चिंता

राज्य सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने अपने आदेश में यह स्पष्ट करते हुए कि सूचना का अधिकार अधिनियम में दस्तावेजों के प्रबंध एवं विनाश संबंधित पद्धतियों में आवश्यक परिवर्तन करने के अधिकारिता आयोग के पास है, प्रमुख सचिव सामान्य प्रशासन विभाग को आदेशित किया कि पब्लिक रिकॉर्ड के प्रबंधन और प्रशासन के लिए मध्यप्रदेश का पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट  बनवाने के लिए विभागीय स्तर पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। साथ में राज्य सूचना आयोग ने यह भी कहा है कि जब तक पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट बंद कर लागू नहीं होता है उस समय अवधि के लिए केंद्र के पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के अनुरूप मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड मेंटेनेंस के लिए गाइडलाइन जारी कर समस्त विभागों को निर्देशित किया जाए इस प्रकरण में सिंह ने  23 जनवरी 2023 तक सामान्य प्रशासन विभाग से रिपोर्ट तलब की है। 

वैसे आश्चर्य का विषय है कि मध्य प्रदेश राज्य के गठन से लेकर अब 66 साल बीत जाने के बाद पहली बार पता चल रहा है कि मध्यप्रदेश में दस्तावेजों के रखरखाव, प्रबंधन के लिए पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट ही नहीं है। जबकि केंद्र एवं अन्य राज्यों का अपना पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट है जिसके तहत कार्यालय में फाइलों का प्रबंधन सुनिश्चित किया जाता है। जाहिर है कि राज्य के अधिकारियों ने गायब होते दस्तावेजों को कभी गंभीरता से नहीं लिया।