धार्मिक सम्प्रदाय संपत्ति अर्जन का मौलिक अधिकार क्या है जानिए- Fundamental Rights

धार्मिक सम्प्रदाय की स्वतंत्रता के अनुसार प्रत्येक संस्थाओं का अधिकार है कि वह अपने स्तर पर अपने-अपने धार्मिक सम्प्रदाय का प्रचार प्रसार कर सकते हैं एवं पोषण प्राप्त कर सकते हैं। प्रबंध भी स्वयं के अनुसार कर सकते हैं। सवाल यह है कि क्या धार्मिक सम्प्रदाय को संपत्ति अर्जन (कमाई) करने या विधि अनुसार प्रशासन या व्यवस्था, सत्ता आदि करने का अधिकार होता है जानिए।

भारतीय संविधान अधिनियम,1950 के अनुच्छेद 26(ग) एवं 26(घ) की परिभाषा

प्रत्येक धार्मिक सम्प्रदाय को अपनी चल-अचल संपत्ति की कमाई करने एवं स्वामित्व करने का मौलिक अधिकार अनुच्छेद 26(ग) के अनुसार प्राप्त है एवं ऐसी कमाई हुई संपत्ति को विधि अनुसार व्यवस्था या प्रशासन करने का भी अनुच्छेद 26(घ) के अनुसार मौलिक अधिकार प्राप्त है।

साधारण शब्दों में कहे तो धार्मिक सम्प्रदाय अपने अनुसार संस्था के लिए कमाई कर सकते हैं एवं सम्प्रदाय का विस्तार एवं शासन भी अपने अनुसार फैला सकते हैं लेकिन राज्य सरकार सिर्फ अनुच्छेद 25(1)(खंड- ख) के अधीन लोकशान्ति, लोक व्यवस्था, सदाचार स्वास्थ्य के हितों में प्रतिबंधित कर सकती है। Notice: this is the copyright protected post. do not try to copy of this article) :- लेखक ✍️बी.आर. अहिरवार (पत्रकार एवं लॉ छात्र होशंगाबाद) 9827737665

इसी प्रकार की कानूनी जानकारियां पढ़िए, यदि आपके पास भी हैं कोई मजेदार एवं आमजनों के लिए उपयोगी जानकारी तो कृपया हमें ईमेल करें। editorbhopalsamachar@gmail.com

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